फोटो: चन्द्र शेखर करगेती
जब तलक बैठुल कुनैछी, बट्यावौ- बट्यावौ है गे
पराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे
(Sherda Anpadh Poem)
जो दिन अपैट बतूँ छी,
वी मैं हूँ पैट हौ,
जकैं मैं सौरास बतूँ छी,
वी म्यैर मैत हौ l
माया का मारगाँठ आज
आफी-आफी खुजि पड़ौ,
दुनियल् तरांण लगै दे
फिरलै हाथ हैं मुचि पड़ौ
अणदेखी बाट् म्यौर ल्हि जाऔ- ल्हिजाऔ है गे
पराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे
जनूँ कैं मैंल एकबट्या
उनूँलै मैं न्यार करूँ,
जनू कैं भितेर धरौ
उनूँलै मैं भ्यार धरुं
जनू कैं ढक्यूंणा लिजि
मैंल आपुँण ख्वौर फौड़,
निधानै घड़ि मैं कैं
उनुलै नाँगौड़ करौ
बेई तक आपण आज, निकाऔं निकाऔं है गे
पराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे
(Sherda Anpadh Poem)
ज्यूंन जी कैं छग निदी
मरी हूं सामोउ धरौ,
माटौक थुपुड़ हौ
तब नौ लुकुड़ चड़ौ
देखूं हूं कै कांन चड़ा
दुनियैल् द्वी लाप तक,
धूं देखूं हूं सबैं आईं
आपुंण मैं-बाप तक
बलिक् बाकौर जस, चड़ाऔ है गे
पराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे
जो लोग भ्यारा्क छी ऊं
दुखूं हूँ तयार हैईं,
जो लोग भितेरा्क छी ऊं
फुकूं हूं तयार हैईं
पराई पराई जो भै
ता्त पाणि पिलै गईं,
जनूं थैं आपुंण कूंछी
वीं माट में मिलै गई
चितक छारण तलक बगाऔ-बगाऔ है गे
पराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे यो रीत दुनियैंकी चलि रै
चलण जरूरी छू
ज्यूंन रुंण जरूरी न्हैं
मरण जरूरी छू l
लोग कुनई दुनि बदलिगे
अरे दस्तूर त वीं छन,
छाति लगूणी न्हैं गईं यां बै
आग् लगूंणी वीं छन
जो कुड़िक लै द्वार खोलीं, वैं लठ्याऔ-लठ्याऔ है गे
पराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे
जब तलक बैठुल कुनैछी, बट्यावौ- बट्यावौ है गे
(Sherda Anpadh Poem)
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