Featured

हल्द्वानी में थिएटर वर्कशॉप के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू

उत्तराखण्ड में थिएटर में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है. ‘काफल ट्री फाउंडेशन’ और ‘द शक्ति ऑनसेम्बल’ द्वारा हल्द्वानी में 12 दिसंबर 2022 से 15 दिन की थिएटर वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है. इस थिएटर वर्कशॉप को नाम दिया गया है ‘संवाद.’ इस वर्कशॉप के लिए कोई भी अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है. (Theatre Workshop in Haldwani.)

वर्कशॉप में थिएटर के साथ-साथ भारतनाट्यम, छाओ, बुथो जैसी नाट्य विधाओं में महारथ रखने वाली लक्षिका पाण्डे प्रतिभागियों को थिएटर की बारीकियां सिखाएंगी. मूल रूप से कांडा की रहने वाली लक्षिका फिलहाल हल्द्वानी में रह रही हैं.

वर्कशॉप में एक्टिंग, स्पीच एंड डिक्शन, वॉइस प्रोजेशन एंड मोड्यूलेशन, ब्रेथ वर्क, एलाइनमेंट, एमबॉडीमेंट ऑफ द टैक्स्ट, बॉडी मूवमेंट, इम्प्रोवाइजेशन, कैरेक्टर वर्क, पर्सनालिटी डेवलपमेंट, कांफिडेंस बिल्डिंग और परफॉर्मेंस मेकिंग आदि पहलुओं पर बारीकी से काम किया जाएगा.

वर्कशॉप डायरेक्टर ‘द शक्ति ऑनसेम्बल’ की संस्थापक लक्षिका पाण्डे के पास थिएटर का डेढ़ दशक का अनुभव है. भारतनाट्यम, छाओ, बुथो आदि नाट्य विद्याओं के अलावा वे योगा में भी ट्रेंड हैं. भरतनाट्यम में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने बीबीसी के लिए काम किया. कुछ समय बाद वे ‘ट्रिनिटी लबान कंज़रवेटॉयर’ लंदन में थिएटर का प्रशिक्षण लेने के लिए चलीं गयी.

बाद में उन्होंने देश के कई हिस्सों में ख़ास तौर से बम्बई में थिएटर डायरेक्टर के रूप में काम किया. आईआईटी मुम्बई, ड्रामा स्कूल मुम्बई, जेबीसीएन इंटरनेशनल स्कूल, फ्लेम यूनिवर्सिटी, पुणे, एकोले मोंदिअले वर्ल्ड स्कूल, एक्टिंग अड्डा चैनल ऑफ टाटा स्काई, शाकुंतलम फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट, देहरादून में थिएटर शिक्षक, प्रशिक्षक के तौर पर पर काम किया है. इन दिनों वे उत्तराखण्ड में थिएटर संस्कृति को बढ़ावा देने के काम में जुटी हुई हैं.

15 दिनों  की इस वर्कशॉप के आख़िरी दिन वर्कशॉप के दौरान तैयार प्रस्तुतियों का मंचन भी किया जाएगा.

इस वर्कशॉप में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए ‘काफल ट्री’ के ई मेल के अलावा इन फोन नंबरों पर भी संपर्क किया जा सकता है—  9769547347 / 9690045717 / 9990005798. (Theatre Workshop in Haldwani.)

रूप दुर्गापाल: अल्मोड़ा की बेटी का भारतीय टेलीविजन स्टार बनने का सफर

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा

रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…

5 days ago

चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार

चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…

5 days ago

मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब

2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…

5 days ago

पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे

नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…

1 week ago

‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है

देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…

1 week ago

सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन

पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…

1 week ago