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सतत तरीके अपनाएं, देश को जल संकट से बचाएं
-याशी गुप्ता
एक ओर जहाँ ये देश तरक्की कर रहा है, तो वही दूसरी ओर इस देश की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है. परिणाम ये हैं कि रहने के लिए जगह कम हो रही है और लोगों की मांगें बढ़ रही हैं. बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए देश मे जंगलों को तेजी से साफ किया जा रहा है और जंगल की ज़मीन पर या तो खेती की जा रही है या फिर मकान बनाये जा रहे हैं. इस तेजी से घटते जंगलों का सीधा असर मौसम पर पड़ रहा है. एक और जहाँ देश मे गर्मी तेजी से हर साल बढ़ रही है तो वही दूसरी ओर वर्षा घट रही है. बढ़ती गर्मी ओर घटती वर्षा के कारण हमारे जल स्रोत सूख रहे हैं. जिस कारण लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. अपनी पानी की मांग को पूरा करने के लिए लोग निजी ट्यूबवेल खोद रहे हैं, और ज़मीन से पानी निकल रहे हैं. ऐसे कई कारणों से भूजल स्तर हर साल तेजी से घट रहा है.
यदि हम यही करते रहे तो एक दिन ऐसा भी आ जायेगा की हम पानी के लिए तरस रहे होंगे परन्तु पीने तक को पानी नहीं होगा. वक़्त है कि हम खुद के आदतों मे कुछ बदलाव लायें, सतत तरीकों को अपनाएं, पानी की बहुमूल्यता को समझें ओर उसे बचाएं.
पानी की गंभीर समस्या और इस जल संकट के उबरने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगायें, घरों, स्कूलों अथवा किसी भी बिल्डिंग में वर्षा जल संचयन करने के लिए स्ट्रक्चर बनायें.
देश और दुनिया भर मे जल संकट तेजी से गहराता जा रहा है. ऐसे में लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है. जिसका सीधा असर उनकी जीवन शैली और दिनचर्या पर पड़ रहा है. ऐसे में वर्षा जल संचयन पानी की समस्या से उबरने का सबसे सरल और कारगर उपाय है. इसके माध्यम से हम वर्षा जल का संचयन और भंडारण करके उसे पुनः उपयोग में ला सकते हैं.
वर्षा जल संचयन करने हेतु हमें घर की छतों के निकासी छेदों को पाइप से जोड़ना होगा, जिसके माध्यम से हम वर्षा के जल को प्लास्टिक या कंक्रीट की टंकी या फिर ज़मीन के अंदर बनी टंकी में एकत्रित कर पुनः किसी अन्य प्रयोग में ला सकते हैं. इसके अलावा हम पाइप को सीधा ज़मीन में भी गाड़ सकते हैं, जिसके माध्यम से वर्षा जल बर्बाद होने की बजाए, भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा.
वर्षा जल संचयन सिस्टम को स्थापित करना तथा इसे प्रयोग करना अत्यंत सरल है. इसकी स्थापना तथा संचालन की कुल लागत पाइपिंग सिस्टम की तुलना मे अधिक कम है. इसका रखरखाव भी अत्यंत सरल है.
इसकी सहायता से पानी के बिल में भी कटौती होती है, क्योंकि एकत्रित किये वर्षा जल को घर के अन्य कार्यों को प्रयोग में लाया जा सकता है जैसे की टॉयलेट, फ्लश, कार वाश, गार्डनिंग आदि.
यह मिट्टी के कटाव को भी कुछ हद तक कम करता है. उस क्षेत्र की मिट्टी अधिक उपजाऊ हो जाती है. हम इस एकत्रित किये गए वर्षा जल को खेती में सिंचाई के लिए भी प्रयोग में ला सकते हैं, और वर्षा जल में पाए जाने वाले उपयोगी तत्व फसल के लिए भी लाभकारी होते हैं.
वर्षा जल संचयन भूजल मांग को भी कम करता है- जिस प्रकार जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, लोगों की पानी की मांग भी तीव्रता से बढ़ रही हैं. हालत ये हैं कि लोग अपनी पानी की जरूरत को पूरा करने हेतु ट्यूबवेल की सहायता ले रहे हैं और भूमि के भीतर से पानी को खींच रहे हैं, जिस कारण भूजल स्तर तेजी से घट रहा है. वर्षा जल संचयन की सहायता से हम भूजल स्तर को पुनः बढ़ा सकते हैं.
(काफल ट्री के लिए यह लेख देहरादून की याशी गुप्ता ने भेजा है)
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