पॉली उमरीगर
भारतीय क्रिकेट के सर्वकालीन महानतम खिलाड़ियों में गिने जाने वाले पॉली उमरीगर (Polly Umrigar) ने चालीस के दशक के अन्तिम सालों से लेकर साठ के दशक के शुरुआती सालों तक देश का प्रतिनिधित्व किया. उस समय भारत अधिकाँश मैच हार जाता था लेकिन पॉली उमरीगर अक्सर भारत की पराजय में भी एक चमकीले सितारे की तरह चमकते रहते थे.
जब वे रिटायर हुए तो उस समय तक भारत के सभी बड़े रेकॉर्ड्स उन्हीं के नाम थे – सबसे अधिक टेस्ट मैच, सबसे अधिक रन और सबसे अधिक सेंचुरी. ये सभी कीर्तिमान 1978 तक बरकरार रहे जब तक कि सुनील गावस्कर नीम के एक खिलाड़ी ने आकर इन्हें तोड़ा नहीं.
छः फुट कद वाले मजबूत पॉली उमरीगर की उपस्थिति मैदान में बेहद प्रभावी होती थी. ड्राइव उनका पसंदीदा शॉट था अलबत्ता वे बढ़िया हुक और पुल भी खेलते थे. गेंदबाज के रूप में वे एक सटीक ऑफ-स्पिनर थे जबकि जरूरत पड़ने पर उनसे पारी की शुरुआती गेंदबाजी भी करवाई जाती थी जब वे अपनी आउटस्विन्गरों से विपक्षी टीमों को परेशान किया करते थे.
चाहे बल्लेबाज के रूप में हो, चाहे गेंदबाज के या कप्तान के, पॉली उमरीगर ने अपने समय में मिली हरेक भारतीय विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. विदेशी धरती पर दौरा कर रही भारतीय टीम के किसी भी खिलाड़ी द्वारा बनाया गया सबसे बड़ी पारी खेलने का रेकॉर्ड तीस सालों तक उनके नाम रहा – उन्होंने 1959 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खिलाफ 252 नाबाद का स्कोर बनाया था. उसी साल जब भारत के कानपुर में ऑस्ट्रेलिया को नाटकीय ढंग से परास्त किया था, उन्होंने 27 रन देकर 4 विकेट लिए थे.
एक चतुर कप्तान के रूप में पॉली उमरीगर ने आठ टेस्ट्स में भारत का नेतृत्व किया. इनमें से उन्होंने दो जीते और दो हारे. 1959 में मद्रास में वेस्टइंडीज के साथ हुए टेस्ट मैच से पहले उन्होंने चयनकर्ताओं से हुए एक विवाद के बाद कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था. वीनू मांकड़ और पॉली उमरीगर ही कुल दो भारतीय क्रिकेटर्स हैं जिनके नाम एक पारी में शतक बनाने और पांच विकेट लेने का गौरव है. उन्होंने वेस्ट इंडीज के पोर्ट ऑफ़ स्पेन में यह कारनामा 1962 में अंजाम दिया था. वे पहले भारतीय थे जिन्होंने टेस्ट मैंचों में डबल सेंचुरी बनाई.
क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने के बाद वे भारतीय चयन समिति के चेयरमैन भी रहे और बीसीसीआई के सचिव भी. 7 नवम्बर 2006 को बंबई में कैंसर की लम्बी बीमारी के बाद 80 साल की आयु में उनका निधन हुआ.
उनका जन्म आज ही के दिन यानी 28 मार्च 1926 को महाराष्ट्र के शोलापुर में हुआ था.
वाट्सएप में काफल ट्री की पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें. वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…
पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…
पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…
ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…
उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…
पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…