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कल है फूलदेई का त्यौहार

फूलदेई, छम्मा देई,
दैंणी द्वार, भर भकार,
य देई में हो, खुशी अपार,
जुतक देला, उतुक पाला,
य देई कैं, बारम्बार नमस्कार.
फूलदेई, छम्मा देई.
Phooldei 2020

उत्तराखंड में रहने वालों के लिये यह गीत नहीं यादों का पिटारा है. फूलदेई के जिस त्यौहार से जिसकी सबकी अपनी कुछ न कुछ यादें हैं वह त्यौहार कल मनाया जाना है. उत्तराखंड की संस्कृति ऐसी है जिसमें बच्चों के विशेष त्यौहार होते हैं. इन त्यौहारों में ही एक है फूलदेई.

चैत महीने की संक्रांति को फूलदेई का त्यौहार बड़े उल्लास से मनाया जाता है. इस साल फूलदेई कल यानि 14 मार्च को मनाई जायेगी. कल सुबह की पहली किरण के साथ बच्चे बुरांश, भिटोर, फ्यूँली, आड़ू, खुमानी के फूल लेकर गांव में घर-घर की देहरी पूजने निकल पड़ेंगे.

फूलों को थालियों व रिंगाल की छोटी- छोटी टोकरियों में सजाकर बच्चों की टोलियां गांव के हर परिवार के आंगन में जाकर उसके लिये आशीष मांगेंगे और घर की बुजुर्ग महिला बच्चों को आशीष देते हुए चावल, गुड़, रुपए देगी. बच्चों का यह उत्साह देखते ही बनता है.

उत्तराखंड के गांवों में साल दर साल घर खाली हो रहे हैं. गांव की देहरी भी सूनी हो रही हैं. गावों में जो देहरी आबाद हैं उनके भीतर बस बुजुर्ग बसे हैं. उदासी की चादर में सिमटे इन गावों में फूलदेई के दिन गांव के बुजुर्ग अपनी देहरी में फूल और चावल चढ़ा कर त्यौहार के शगुन को पूरा करते नज़र आ ही जाते हैं.

शहर और कस्बों में बस चुके पहाड़ी परिवारों के पास इतना समय नहीं की गांव के इस त्यौहार के लिये समय निकाल सकें. जो सक्षम हैं उनके बच्चों को गांव के बच्चों का यह त्यौहार मनाने में लाज अधिक आती है.

-काफल ट्री डेस्क

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बच्चों के हर्ष व उल्लास का त्यौहार है फूलदेई

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Girish Lohani

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