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संवरेगी कुमाऊं की सबसे बड़ी बाखली

अल्मोड़ा से हल्द्वानी की ओर निकलने पर एक जगह पड़ती है क्वारब. क्वारब में सुयाल नदी पर बना पुल नैनीताल और अल्मोड़ा जिले की सीमा अलग-अलग करता है. क्वारब से एक रास्ता सुयालबाड़ी, खैरना होता हुआ भवाली को जाता है दूसरा रास्ता भी रामगढ़ होता हुआ भवाली मिलता है.
(Kumati Bakhli Ramgarh Nainital)

क्वारब से भवाली को जाने वाली इस दूसरी राह में 12 किमी बाद एक गांव है कुमाटी. शीतला-मुक्तेश्वर मार्ग पर कफुरा, पोरा गांव के पास स्थित इस गांव में दुपरा शैली में बनी एक कुमाऊनी बाखली है. दूर से ही नजर आने वाली कुमाटी गांव की बाखली के विषय में दावा किया जाता है कि यह कुमाऊं की सबसे लम्बी बाखली है. मिट्टी और पत्थर से बनी इस बाखली की तस्वीरें पहले भी सोशियल मीडिया में पहले भी खूब पसंद की जा चुकी हैं.  

फोटो : अपूर्व पांडेय की फेसबुक वाल से साभार

कुमाटी गांव की इस बाखली के सौंदर्यीकरण के लिए नैनीताल के जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने एक अहम कदम उठाते हुये एक प्रस्ताव शासन को भेजा. इस प्रस्ताव को पर्यटन विभाग सराहते हुए बाखली को संवारने और संस्कृति संरक्षण के लिए 50 लाख रूपये जारी किये.
(Kumati Bakhli Ramgarh Nainital)

कुमाऊं में दुपरा शैली में निर्मित भवन मुख्यतः आयताकार होते हैं. दुपरा शैली के भवनों का निर्माण थोकदारों और गढ़पतियों ने बतौर किले के रूप में किया. डुपर शैली के भवन विकसित करने का श्रेय कत्यूर और चंद राजाओं को जाता है. इन भवनों में असीन, उत्तीस, खरसू, तून आदि की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है.

कुमाटी की 150 बरस पुरानी यह बाखली आज भी आबाद है. इस बाखली में आज भी दस से बारह परिवार रहते हैं. सामाजिक सामूहिकता दिखाती इस बाखली की छ्त तीन सौ फीट लम्बी है.

पिछले चार-पांच वर्षों से सोशियल मीडिया में चर्चा का विषय रही कुमाटी की बाखली को पर्यटन से जोड़ने और एक नई पहचान दिलाने के लिये नैनीताल जिला प्रशासन की खूब तारीफ़ की जा रही है. इस संबंध में नैनीताल के जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने कहा-

बाखली के संरक्षण के साथ ही भवन स्वामियों की सहमति से कुमाटी को स्टेट ऑफ़ द आर्ट (State of the Art) के रूप में विकसित कर युवाओं को रोजगार प्रदान करने की दिशा मे कार्य किया जायेगा.         
(Kumati Bakhli Ramgarh Nainital)

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