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इन मुश्किल दिनों में तीन कुमाऊनी गीत

लॉकडाउन के समय में परेशानियों से जूझ रहे लोग आपसी सहयोग से जिंदगी को थोड़ा आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जब सामान्य जनजीवन ठप है और कई अनसुलझे सवाल, तो अपना मनोबल बनाये रखने के लिए रचनात्मक काम करते रहने वाले कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं. (Kumaoni Songs by Karan Joshi)

इसी कड़ी में गीत-संगीत की दुनिया में दखल रखने वाले करन जोशी 3 कुमाऊनी गीत लेकर आये हैं. तीनों ही गीत उत्तराखण्ड के संगीत के दिग्गजों द्वारा लिखे गाये गए गीतों के कवर गीत हैं. कबूतरी देवी, गिर्दा और हीरा सिंह राणा के ये सर्वकालिक लोकप्रिय गीत भाषा और संगीत की विविधता लिए हुए हैं.  

अपने यू ट्यूब चैनल केदारनाद के जरिये करन ने इन गीतों को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया है. ये गीत बेहद मामूली संसाधनों के साथ घर में ही रिकॉर्ड किये गए हैं.     

पिछले कुछ सालों से उत्तराखण्ड के युवाओं द्वारा लोक संगीत को नए कलेवर में पेश करने का चलन देखने में आया है. इन कोशिशों में गाने को भौंडा बनाने के बजाय उनकी पहाड़ी आत्मा को बचाये-बनाये रखने के जतन भी किये जा रहे हैं.

आधुनिक और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संयोग से बने ये गीत ख़ास तौर से युवाओं के बीच लोकप्रिय भी हो रहे हैं. ऐसे युवाओं कि संख्या भले ही कम है लेकिन ये उत्तराखण्ड के लोकसंगीत की नयी आशा जरूर हैं.

हल्द्वानी के करन जोशी इसी कड़ी में अपने सुर जोड़ रहे हैं. करन गायक हैं, साजिंदे और संगीतकार भी.

करन ने महानगर में खपने के बाद पहाड़ लौटकर उत्तराखंडी संगीत की दिशा में कुछ प्रयोग करने की शुरुआत करने के बारे में सोचा. वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लौटकर हल्द्वानी में अपना जम-जमाव करने के बाद संगीत की लगन में लग गए. फ़रवरी में उत्तराखण्ड के लोक कवि व संस्कृतिक-सामाजिक कार्यकर्त्ता गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के गीत ‘दिगौ लाली’ से उन्होंने अपनी लोकसंगीत की पारी की शुरुआत की. 

करन जोशी के यू ट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करने के लिए इस लिंक को क्लिक करें: केदारनाद

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Sudhir Kumar

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