फोटो: सुधीर कुमार
उत्तराखण्ड में नामों के आखिर में खान शब्द प्रायः देखने को मिलता है, ख़ास तौर पर कुमाऊँ में. धार, गाड़, डांडा, कोट, खाल की तरह ही खान शब्द का प्रयोग भी बहुतायत से मिलता है. उर्दू भाषा का बोध कराने वाला यह शब्द आखिर उत्तराखंड की भाषा में कब और कैसे शामिल हुआ?
दरअसल इस खान शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के खण्ड से हुई मानी जाती है. उत्तराखंड में घरों के किसी एक हिस्से को भी खन (खण्ड) कहा जाता है. इसी तरह किसी ख़ास जगह या किसी व्यक्ति से सम्बद्ध जमीन के टुकड़े के लिए भी खन या खान शब्द इस्तेमाल में लाया जाता है.
संस्कृत भाषा का शब्द खण्ड ही आम बोलचाल की भाषा में खन या खान कहा जाने लगा.
उत्तराखंड में इस शब्द का इस्तेमाल कई जगहों के लिए किया जाता है. ममड़खान, कफड़खान, मंगलीखान, ज्योलीखान, नथुवाखान, चीनाखान, भतरौजखान, काफलीखान, हैड़ाखान, महेशखान, कैलाखान, बल्दियाखान, कलिकाखान आदि.
(उत्तराखंड ज्ञानकोष, प्रो. डी.डी. शर्मा के आधार पर)
वाट्सएप पर हमारी पोस्ट प्राप्त करें: Watsapp kafal tree
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
उत्तराखण्ड का अधिकांश भूभाग हिमालय की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित है, जहाँ तीव्र ढाल, गहरी नदी घाटियाँ, युवा…
पनार बुग्याल के ऊपरी छोर वाले रास्ते पर अब हम चल रहे हैं. पनार चोटी…
पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा…
जिम कॉर्बेट उन चुनिंदा विदेशी मूल के भारतीयों में से एक हैं जिन्होंने भारत में…
रात का वक्त था. जुलाई की बारिश पहाड़ों को भिगो रही थी, और भिलंगना नदी हमेशा…
मानव इतिहास में सत्ता के विरुद्ध विरोध उतना ही पुराना है जितना संगठित शासन. प्रारंभिक…
View Comments
भारतीय परिवेश वातावरण मे पहली बढ़ी भाषा उर्दू है इसकी उत्पत्ति यहाँ हुई इसके शब्दों को हर जगह के प्रचलित समझे जाने वाले शब्दों को खुलेमन से लिया गयाजो इसकी समृद्धि का कारण हैं एक शब्द तरकारी जो पूर्वाचल मे सब्जियों के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं सुना कर अच्छा लगता है