Featured

उत्तराखण्ड में जगहों के नामों में क्यों लगता है खान

उत्तराखण्ड में नामों के आखिर में खान शब्द प्रायः देखने को मिलता है, ख़ास तौर पर कुमाऊँ में. धार, गाड़, डांडा, कोट, खाल की तरह ही खान शब्द का प्रयोग भी बहुतायत से मिलता है. उर्दू भाषा का बोध कराने वाला यह शब्द आखिर उत्तराखंड की भाषा में कब और कैसे शामिल हुआ?

दरअसल इस खान शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के खण्ड से हुई मानी जाती है. उत्तराखंड में घरों के किसी एक हिस्से को भी खन (खण्ड) कहा जाता है. इसी तरह किसी ख़ास जगह या किसी व्यक्ति से सम्बद्ध जमीन के टुकड़े के लिए भी खन या खान शब्द इस्तेमाल में लाया जाता है.

संस्कृत भाषा का शब्द खण्ड ही आम बोलचाल की भाषा में खन या खान कहा जाने लगा.

उत्तराखंड में इस शब्द का इस्तेमाल कई जगहों के लिए किया जाता है.  ममड़खान, कफड़खान, मंगलीखान, ज्योलीखान, नथुवाखान, चीनाखान, भतरौजखान, काफलीखान, हैड़ाखान, महेशखान, कैलाखान, बल्दियाखान, कलिकाखान आदि.

(उत्तराखंड ज्ञानकोष, प्रो. डी.डी. शर्मा के आधार पर)

वाट्सएप पर हमारी पोस्ट प्राप्त करें: Watsapp kafal tree

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

View Comments

  • भारतीय परिवेश वातावरण मे पहली बढ़ी भाषा उर्दू है इसकी उत्पत्ति यहाँ हुई इसके शब्दों को हर जगह के प्रचलित समझे जाने वाले शब्दों को खुलेमन से लिया गयाजो इसकी समृद्धि का कारण हैं एक शब्द तरकारी जो पूर्वाचल मे सब्जियों के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं सुना कर अच्छा लगता है

Recent Posts

पंतनगर विश्वविद्यालय: हरित क्रांति की वह कहानी, जिस ने भारत के गाँवों की तस्वीर बदल दी

एक ऐतिहासिक यात्रा : कृषि, विज्ञान और किसानों के सपनों की कहानी (Pantnagar University Green…

2 days ago

मशीन को मनुष्य बनाते मनुष्य (`वी वर हियर’ ऐज़ ‘ह्यूमंस इन द लूप’!)

मनुष्य होने का मतलब क्या है? एआई से पूछें? लगता तो ऐसा ही है कि…

2 days ago

उत्तराखंड के पहाड़ों का कटु सत्य है पायर “चिता”

विनोद कापड़ी द्वारा निर्मित चर्चित फ़िल्म पायर "चिता" पूरे देश में रिलीज गई है. 26…

4 days ago

डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया: उत्तराखंड के इतिहास, समाज और अर्थव्यवस्था को समझने की एक दृष्टि

पिछली कड़ी : धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’ डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया की पुस्तक, "द कुमाऊं…

4 days ago

पहाड़ का वह बूढ़ा पिता

पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…

2 weeks ago

कुमाऊं में रामलीला की परम्परा

सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…

3 weeks ago