Featured

कत्यूरी राजवंश: उत्तराखण्ड का शक्तिशाली साम्राज्य

कत्यूरी राजवंश ने उत्तराखण्ड पर लगभग तीन शताब्दियों तक एकछत्र राज किया. कत्यूरी राजवंश की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने अजेय मानी जाने वाली मगध की विजयवाहिनी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. (Katyuri Dynasty of Uttarakhand)

कत्यूरी राजवंश की पृष्ठभूमि, प्रवर्तक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में उभरने का कोई प्रमाणिक लेखा-जोखा नहीं मिलता है. यह इतिहासकारों के लिए अभी शोध का विषय ही है. इस सम्बन्ध में मिलने वाले अभिलेखों से कत्यूरी शासकों का परिचय तो मिलता है लेकिन इसके काल निर्धारण में सहायता नहीं करते. इसी वजह से कत्यूरी शासन के कालखंड को लेकर इतिहासकारों में मतभेद बने हुए हैं.

कहा जाता है कि कत्यूरी शासक अयोध्या के सूर्यवंशियों के वंशज थे, हालाँकि इसका भी सुस्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता. कत्यूरों ने स्थानीय खश शासकों को पराजित करके यहां अपना साम्राज्य स्थापित किया था.

इतिहासकारों का मानना है कि इसके प्रथम शासक प्रतापी राजा ललित सूरदेव हुए. ललित सूरदेव से लेकर वीरदेव तक कत्यूरों की 13 पीढ़ियों ने उत्तराखण्ड में शासन किया, हालाँकि इसका क्रमबद्ध इतिहास नहीं मिलता.

माना जाता है कि कत्यूरी शासन का आरंभ 850 ई. के लगभग हुआ, जो कि 1015 तक रहा. लेकिन समुद्रगुप्त (335 से 375 ई.) के मंत्री हरिषेणकृत प्रयाग स्तम्भ पर उत्कीर्ण प्रशस्ति के अनुसार कर्तिकेयपुर का राज्य अन्य सीमावर्ती राज्यों से समृद्ध राज्य था. इसके अवशेष आज भी बैजनाथ में रणचूलाकोट, तैलिहाट, सेलिहाट में देखे जा सकते हैं.

कत्यूरी साम्राज्य का विस्तार पूर्व में डोटी से लेकर पश्चिम में यमुना तक तथा उत्तर में मानसरोवर से दक्षिण में रूहेलखंड तक हुआ करता था.

कत्यूरी शासनकाल में कलाकौशल के क्षेत्र में भारी तरक्की हुई. इस दौरान कई भव्य मंदिरों, मूर्तियों तथा उत्कृष्ट शिल्प वाले भवनों का निर्माण हुआ. (Katyuri Dynasty of Uttarakhand)

कत्यूरी साम्राज्य का प्रशासनिक ढांचा गणतांत्रिक हुआ करता था. इसका संचालन 18 सदस्यों वाली ‘अधिष्ठान’ द्वारा किया जाता था. उत्तरवर्ती काल में इसकी जगह ‘रजबार अधिष्ठान’ ने ले ली, जिसे 12 राजाओं की सभा भी कहा जाता था.

इतिहासकारों के अनुसार कत्यूरों की राजधानी मूलतः जोशीमठ में हुआ करती थी, जिसे ब्रह्मपुर नाम से पहचाना जाता था. राजा असन्तिदेव के समय में इसे कत्यूर (बैजनाथ) में स्थानांतरित कर दिया गया.

अटकिंसन ने अस्कोट, डोटी, पालीपछाऊँ से प्राप्त गुरुपादुका नामक पुस्तक के आधार पर एक चौथी वंशावली का भी वर्णन किया है. इसे अन्य तीनों की अपेक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें वंशावली के अलावा कई राज कर्मचारियों के अलावा महत्वपूर्ण राजनीतिक व धार्मिक घटनाओं का वर्णन भी मिलता है. इसके अनुसार जोशीमठ से शासन करने वाले कत्यूरी शासक थे— 1. अग्निराय, 2. फेलाराय, 3. सुबतीराय, 4. केशवराय, 5. बगड़राय, 6. आसन्तीराय, 7. वासन्तीराय, 8. गोरारे, 9. श्यामलराय, 10. इलणा देव, 11. प्रितमदेव, 12. धामदेव.

प्रख्यात इतिहासकार मदनचन्द्र भट्ट के अनुसार के अनुसार कट कत्यूरी युग 1200 से 1545 ई. तक माना जा सकता है. इस समय कत्यूरी शासन की राजधानी रणचूलाकोट में थी. इसी के पश्चिम में 2 राजधानियां वैराट (चौखुटिया और लखनपुर) थी तथा पूर्व में हाटथर्प (डीडीहाट) और ऊकू (नेपाल) थीं.

रामायण प्रदीप के अनुसार देवलगढ़ का राजा अजयपाल (1500 से 1548 ई.) कत्यूरियों का सोने का सिंहासन छीनकर श्रीनगर ले गया था. अतः कत्यूरी राज्य का पतन अजयपाल के अभुदय के बाद ही हुआ.

(उत्तराखण्ड ज्ञानकोष: प्रो. डीडी शर्मा के आधार पर)

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

3 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

3 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

3 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

3 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

3 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

3 weeks ago