विनीता यशस्वी

कोसी कटारमल का सूर्य मंदिर

कोसी कटारमल के सूर्य मंदिर कैम्पस में खड़े होकर एक पत्थर जिसमें अजीब सी भाषा में कुछ लिखा हुआ है, की ओर इशारा करते हुए शम्भू राणा जी ने मुझसे कहा – ‘क्या तुम इस भाषा के बारे में कुछ जानती हो ?’ उस पत्थर की ओर कुछ देर तक गौर से देखने के बाद मैंने नहीं के इशारे में सर हिला दिया. फिर उन्होंने बताया कि इस भाषा को अभी तक कोई भी नहीं समझ सका है.

शम्भू राणा जी ने मुझे कोसी कटारमल के सूर्य मंदिर चलने के लिये बहुत पहले से कहा था. उस दिन जब मैं अल्मोड़ा गयी तो अगले दिन शम्भू जी के साथ ही सूर्य मंदिर देखने भी चली गयी जो अल्मोड़ा से 14 किमी. दूर कोसी गांव में है.

कोसी में खाना खा चुकने के बाद हम दोनों ने पैदल मंदिर तक जाने का तय किया और कच्ची सड़क, जिस पर डामर होना बांकि था, पर पैदल निकल पड़े हालांकि शम्भू जी को पैदल चलने में थोड़ा परेशानी होती है पर फिर भी उन्होंने पैदल चलने का ही तय किया.

कुछ देर पैदल चल लेने के बाद हम मंदिर कैम्पस में पहुंच गये जिसके गेट पर ही आर्कियोलाॅजिकल डिपार्टमेंट का बोर्ड लगा है जिसमें मंदिर के बारे में बताया गया है और यह भी लिखा है कि मंदिर अब आर्कियोलाॅजी डिपार्टमेंट के पास है.

ये मंदिर छठीं से 9 वीं शताब्दी के बीच कत्यूर वंश के राजा कटारमल द्वारा बनावाया गया था. इस मंदिर की गिनती कुमाऊँ के विशालतम मंदिरों में तो होती तो है साथ ही यह अपनी शिल्प कला के लिये भी प्रसिद्ध है और भारत के गिने-चुने प्राचनी सूर्य मंदिरों में से एक है.

इस मंदिर में 45 छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है. मुख्य मंदिर की उंचाई अन्य मंदिरों से अधिक है पर इसका सबसे उच्चतम शिखर किन्हीं कारणों वश खंडित हो गया था. मुख्य मन्दिर की संरचना त्रिरथ है और वर्गाकार गर्भगृह के साथ वक्ररेखी शिखर सहित निर्मित है. गर्भगृह का प्रवेश द्वार बेजोड़ काष्ठ कला का बेहतरीन नमूना था पर अब यह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित है.

एक मंदिर में बने एक चैकोर छेद की ओर इशारा करते हुए शम्भू जी ने फिर बताया – इस छेद से होते हुए सूर्य की पहली किरण मुख्य मंदिर में रखी सूर्य प्रतिमा पर पड़ती है. पर मुख्य मंदिर अब बन्द कर दिया गया है. इस मंदिर से हिमालय का नजारा भी दिखता है.

इस मंदिर में कुछ समय बिता के हम वापस आ गये.

विनीता यशस्वी

विनीता यशस्वी नैनीताल  में रहती हैं.  यात्रा और  फोटोग्राफी की शौकीन विनीता यशस्वी पिछले एक दशक से नैनीताल समाचार से जुड़ी हैं.

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