व्यक्तित्व

देवभूमि की कथा वाचिका ज्योत्सना पांडे

मेरा नाम हिमसुता ज्योत्सना पांडे है. मैं उत्तराखंड के एक छोटे से गांव, जिसे कस्बा भी कह सकते हैं, ताड़ीखेत से हूं. यहां मैंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की, तत्पश्चात मेरा खेलों की तरफ काफी रुझान रहा.

इसी वजह से मेरा सिलेक्शन एथलेटिक्स छात्रावास रुद्रप्रयाग, अगस्तयमुनि में हो गया, जहां लगभग 4 साल मैंने पढ़ाई की.

आध्यात्मिक जीवन बचपन से ही मुझे आकर्षित करता रहा. माता-पिता के संस्कारों के द्वारा ही इस क्षेत्र में आने की काफी प्रेरणा मिली. भजन, संस्कृत के श्लोकों को बोलना तथा अनेक अन्य धार्मिक गतिविधियों में हिस्सेदारी करना मेरे बचपन में शामिल रहा. ज्योतिष विद्या में भी बचपन से ही रुझान था. यह सब मैंने अपने पिताजी के सानिध्य में ही सीखा,मेरे पिता ही मेरे गुरु रहे.

क्षेत्र में आने का सबसे खास मकसद यह है कि मैं समाज में फैली रूढ़िवादिता को समाप्त करने में कुछ योगदान दे सकूं. महिलाओं के अधिकारों के लिए उन्हें जागृत करना चाहती हूं. महिलाओं का उत्थान और समाज में उन्हें बराबरी के अधिकार मेरा सपना है. जाति के नाम पर चल रही अनेक प्रकार की कुप्रथा को समाप्त हो ऐसा मेरा मानना है.

मैंने पीसीएम से 12वीं कक्षा पास की है. एक खिलाड़ी के तौर पर भी ढेरों पुरस्कार हासिल किए हैं, जिसमें एनएसएस में राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट हार्ड वर्किंग अवार्ड भी शामिल है’
धार्मिक क्षेत्र में आने का प्राथमिक विचार यह है कि अपनी संस्कृति, सभ्यता को प्जोरचारित, प्रसारित करना जो कि धीरे-धीरे कमजोर हो रही है. समाज का पुनर्गठन करना. पहाड़ के विकास के लिए प्रयास करना. महिलाओं की शिक्षा के लिए काम करना. सर्वांगीण शिक्षा के लिए ही हमारे द्वारा श्री राम सेवा ट्रस्ट की स्थापना भी की गई है.

इस ट्रस्ट या संस्थान के द्वारा गरीब बच्चों को पढ़ाना तथा गरीब कन्याओं की देखरेख तथा गौशाला स्थापित करना इत्यादि विभिन्न प्रकार के कार्यों को किया जा रहा है.

हल्द्वानी के बैंककर्मी विनोद प्रसाद लम्बे समय तक कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं.

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Sudhir Kumar

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