पहाड़ियों के घर में आज हरेला तैयार हो चुका होगा. हरेला यानी पांच या सात प्रकार के अनाजों की हरी-पीली लम्बी पत्तियां. कल हरेले की पूजा होगी और हरेला काटा भी जायेगा. काटने के बाद पहाड़ी इसे अपने कान के पीछे और सिर पर पूरी सान से रखेंगे. इसके अलावा गाय के गोबर संग हरेला अपने घर की चौखट पर भी लगाया जायेगा.
(Harela Festival Date 2024)
हरेला पर्व सावन के पहले दिन मनाया जाता है इस दिन से सूर्य मकर से कर्क रेखा की ओर अग्रसर होता है इसलिये इए कर्क संक्रांति भी कहा जाता है. इस पर्व के दिन घर की बेटियों, बहिनों और पंडितों को दक्षिणा दी जाती है.
घर की सबसे बुजुर्ग महिला परिवार के सभी सदस्यों के कान के पीछे और सिर पर हरेला रख आशीष देती है. पृथ्वी के समान धैर्यवान और आकाश के समान उदार रहने के साथ हिमालय में हिम और गंगा में पानी रहने तक इस दिन को देखने और मिलने की कामना की जाती है –
(Harela Festival Date 2024)
लाग हरैला, लाग बग्वाली
जी रया, जागि रया
अगास बराबर उच्च, धरती बराबर चौड है जया
स्यावक जैसी बुद्धि, स्योंक जस प्राण है जो
हिमाल म ह्युं छन तक, गंगज्यू म पाणि छन तक
यो दिन, यो मास भेटने रया
परम्परा रही है कि आज के दिन एक पेड़ जरुर रोपा जाता है. यह माना जाता है कि आज के दिन रोपा गया पेड़ कभी नहीं सूखता है. पहाड़ में लोग कई जगहों पर अपने खेत की मेड़ों पर आज के दिन पेड़ रोपते आज भी देखने को मिल जायेंगे.
ऐसा लगता है जैसे अभी बीते दिनों की ही तो बात हो जब बरसात के इन दिनों फौजी और प्रवासी पहाड़ी भारतीय डाक से आने वाले अन्तर्देशी लिफाफे का बेसब्री से इंतजार रहता. इन दिनों फौजी और प्रवासी पहाड़ियों की आने वाली चिठ्ठी बाहर से ही पहचानी जा सकती थी क्योंकि उसमें मोहर के साथ लगा होता पीला पिठ्या और भीतर से निकली होती हरेले की पत्तियां. दुनिया के लिये यह महज घास की पत्तियां हुआ करती थी पर एक पहाड़ी के लिये इसके क्या मायने थे इसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता.
(Harela Festival Date 2024)
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