Featured

हमारा लोकपर्व घ्यूं त्यार है आज

काफल ट्री का यूट्यूब चैनल

अपनी विशिष्ट लोक परम्पराओं से उत्तराखंड के लोग अपने समाज को अलग खुशबू देते हैं. शायद ही ऐसा कोई महिना हो जब यहां के समाज का अपना कोई विशिष्ट त्यौहार न हो. ऐसा ही लोकपर्व आज घी त्यार या घ्यूं त्यार. भादो महीने की संक्रान्ति को कुमाऊँ और गढ़वाल में घ्यू त्यार मनाया जाता है. इसे ‘ओलकिया’ या ‘ओलगी’ संक्रान्त भी कहते हैं.
(Ghee Sankranti Festival Uttarakhand)

जब कुमाऊं के इलाकों में चंद राजाओं का शासन था तब शिल्पी लोग इस दिन अपनी कारीगरी और दस्तकारी की चीजों को दिखाकर पुरस्कार पाते. ऐसे लोग जो खेती का काम करते वह साग-सब्जी, दही दुग्ध, मिष्ठान और अन्य प्रकार की बढ़िया चीजें दरबार में ले जाते. इस तरह की प्रथा ओलग देने की प्रथा कहलाती.

ओलग दरबार के अतिरिक्त अन्य मान्य व्यक्तियों को भी दिया जाता था. जैसे लड़की का ससुराल पक्ष उसके मायके पक्ष को केले की घडी, ककड़ी, गाबे, मूली, घी आदि दिया करते. कई स्थानों पर ओल्गा भेंटने की भी परम्परा है.
(Ghee Sankranti Festival Uttarakhand)

आज के दिन पहाड़ी परिवारों में खूब पकवान बनाये जाते हैं. पूड़ी, उड़द की दाल की पूरी व रोटी, बड़ा, पुए, मूला-लौकी-पिनालू के गाबों की सब्जी, ककड़ी का रायता और खीर हर पहाड़ी के घर में बनते हैं. आज के दिन के भोजन में खूब सारा घी डालकर खाया जाता है. आज के दिन जो घी नहीं खाता वह अगले जन्म में गनैल बनता है.
(Ghee Sankranti Festival Uttarakhand)

-काफल ट्री डेस्क  

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

1 week ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

1 week ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

1 week ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

2 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

2 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

2 weeks ago