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गंगा और यमुना नदियों का पानी आचमन योग्य नहीं रहा

दिल्ली निवासी आचार्य अजय गौतम ने उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखकर प्रार्थना की थी कि उत्तराखंड की दो पवित्र नदियों गंगा और यमुना में पानी की गुणवत्ता अब बहुत खराब हो गई है और उत्तराखण्ड की गंगा और यमुना नदियों का पानी आचमन योग्य नहीं रहा. संबंधित पत्र को उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया है.

न्यायमूर्ति वी.के.बिष्ट और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने पत्र को जनहित याचिका मानते हुए अजय वीर को एमिकस क्यूरी (वाद मित्र) नियुक्त किया है.  खण्डपीठ ने अधिवक्ता अजय वीर पुंडीर की प्रार्थना के बाद इन नदियों के गुजरने वाले पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखण्ड को पार्टी बनाते हुए नोटिस भेजा है.

एमिकस क्यूरी बनाए गए अधिवक्ता अजय वीर पुंडीर ने बताया कि ये नदियां जिन मुख्य शहरों से गुजरती हैं, पोंटा साहिब, यमुना नगर, दिल्ली, मथुरा, आगरा, ईटावा, कालपी, कानपुर और इलाहाबाद, वहां इन नदियों में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा बताई गई है. मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी तय हुई है.

इससे पहले कल उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा के घाटों की हर तीन घंटे में सफाई करने के आदेश जारी किए थे. हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने डीएम हरिद्वार को इसके लिए नोडल अधिकारी बनाया है. कोर्ट ने उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के साथ जल संस्थान को भी निर्देश दिए हैं कि गंगा की साफ सफ़ाई के लिए ठोस कदम उठाए.

कुछ दिन पहले गंगा को लेकर एनजीटी ने भी आदेश जारी किया कि जिस तरह सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी लिखी होती है कि ‘इसे पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’ उसी तरह हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं कि ‘गंगा में स्नान करने या गंगा जल पीने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है’. एनजीटी ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह आदेश जारी किया है.

 

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Girish Lohani

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