समाज

बुढ़िया के घर में नौसिखिया लड़का- लोककथा

एक बार एक बुढ़िया ने जातर ठीक करने के लिये कुंवर सिंह नाम के व्यक्ति को बुलावा भेजा. कुंवर सिंह इलाके भर में गेहूं, चावल, मडुवा, मक्का पीसने के लिए हाथ से चलाई जाने वाली पत्थर की चक्की, जिसे लोग जातर कहते थे, को ठीक करने वाला एकमात्र आदमी था. बुलावे पर कुंवर सिंह के बजाय दूसरा आदमी देखकर बुढ़िया ने उससे पूछा- तू किसका लड़का है रे, कुंवर सिंह जो क्यों नहीं आया.
(Folk Story Old Women)

काखी मैं कुंवर सिंह का सबसे छोटा लड़का हूँ बाबू बूड़ी गये तो आजकल मैं ही इधर-उधर जाता हूं, लड़के ने जवाब दिया.

बुढ़िया ने लड़के को पहचानते हुये कहा- अरे च्याला मदन, तू तो जवान हो गया है, पर मेरा तो बड़ा पुराना जातर है च्याला, मेरी बुढ़िया सास अपने मायके से लाई थी. तेरे बस की नहीं है तू कुंवरिया को ही भेजना.

काखी कैसी जो बात कर रही हो. पूरी बाईस पट्टी के गांव के जातर मैं ही देख रहा हूँ. मेरा हाथ बाबू के हाथ से भी ज्यादा सधा है. मैं एक बार जो किसी चीज में हाथ लगा देता हूँ फिर वो सात पुस्त तक खराब नहीं होती, लड़के ने जवाब दिया  

ओ ईजा मुंह तो तेरा खूब चलता है, काम भी ऐसा करता है या नहीं बुढ़िया ने लड़के से ठिठोली की.

ठिठोली का जवाब ठिठोली में देते हुये लड़का बोला- काखी ऐसा काम कर जाऊँगा तेरी ब्वारी के सौरास वाले तक जातर ठीक करने वाले का नाम पता पूछते फिरेंगे.

हां-हां देखा जाएगा. तू भीतर जाकर जातर बना मैं नौले से पानी लाती हूँ. चूल्हे में जौला रखा है उसको भी देखते रहना हां. कहते हुये बुढ़िया अपना बर्तन उठाकर नौले की ओर चली गयी.

लड़के ने भीतर जाकर अपना झोला निकाला और जातर का अच्छी तरह से मुआयना किया फिर अपने झोले छिनी और हथौड़ा निकालकर जोर से जातर पर चोट की. जातर में लगी चोट से उसके दो टुकड़े हो गये और जातर घुमाने वाली लकड़ी सीधे घी के बर्तन से जा टकराई और घी का बर्तन फुटकर सीधा चूल्हे की आग में गिर पड़ा.
(Folk Story Old Women)

चूल्हे की आग में घी पड़ने से आग तेज और गयी. लड़के को लगा जातर और घी का तो काम हो गया पर जौले को बजाया सकता है. जल्दी से वह चूल्हे के पास गया और दोनों हाथों से गर्म कढ़ाई उठाने लगा उँगलियाँ जल गयी और कढ़ाई भी हाथ से छुट गयी और जौला भी बिखर गया. और अब पूरे भीतर धुआं-धुआं हो गया,.

लड़के की आँखों में जलन होने लगी और उसका दम घुटने लगा. उसे कुछ समझ न आया तो उसने सोचा यहां से निकल लिया जाये. आँखें मलते-मलते जब वह बाहर निकलने लगा तो दरवाजे पर बुढ़िया से टकरा गया. बुढ़िया के सिर पर रखा पानी का बर्तन भी नीचे गिरकर टूट गया. बुढ़िया ने गुस्से में कहा- अरे रनकारा तूने मेरा बर्तन तोड़ दिया. अब मैं प्यासी रह जाऊगी.  

लड़का बाहर निकलते ही तेज कदमों से भागता-भागता बोला- मैं नहीं जानता काखी अब तू किस-किस चीज के लिये रोयेगी. जातर के लिये रोयेगी, घी के लिये रोयेगी, अपनी छत के लिये या इस पानी के बर्तन के लिये. मैं तो गया.

बाईस पट्टी का काम देखने वाला लड़का ऐसा रफ्फूचक्कर हुआ कि फिर कभी किसी गांव में नजर नहीं आया.
(Folk Story Old Women)

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