एक राज्य में बहुत ही दयालु राजा अपनी रानी के साथ ख़ुशी-ख़ुशी रहता था. उसका राज्य भी ख़ुशहाल था, लेकिन बस एक ही दुख था कि उसकी कोई संतान नहीं थी. रानी रोज़ ईश्वर से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगती, ख़ासतौर से वह सूर्य देव से प्रार्थना करती कि उन्हें सब कुछ मिला है, कोई कमी नहीं, बस एक संतान भी मिल जाए, तो जीवन संपूर्ण हो जाए. एक रोज़ सूर्य देव ने उन्हें आशीर्वाद दिया. तालाब के पास ही एक जादुई मेंढक आया और उसने कहा कि तुम्हारी गोद ज़रूर भरेगी और तुम्हें एक बहुत ही सुंदर-सी बेटी होगी. और सचमुच कुछ समय बाद रानी की गोद भर गई. उन्हें एक प्यारी सी बेटी हुई, जो बेहद ख़ूबसूरत थी. सूर्य देव के आशीर्वाद से वह मिली थी, सो उसका नाम सनशाइन रखा गया. राजा ने ख़ुशी में एक दावत का ऐलान किया. पूरा राज्य इस दावत में शामिल हुआ. राजा-रानी ने परियों को और विद्वानों को भी ख़ासतौर से न्यौता भेजा, ताकि उन सबका आशीर्वाद भी बच्ची को मिल सके. अंत में राजा-रानी ने हर किसी को सोना भी दान में दिया. (Fairy Tale Sleeping Beauty)
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जो 12 परियां इस दावत में ख़ासतौर से आमंत्रित थीं, उन्होंने एक-एक कर बच्ची को ख़ूबसूरती, उदारता, ईमानदारी, ख़ुशियां आदि का आशीर्वाद दिया. जैसे ही आख़िरी परी आशीर्वाद देने पहुंची, तो पूरे कमरा अजीब से धुएं से भर गया और वहां प्रकट हुई एक काली परी. उसने कहा कि सबको यहां बुलाया गया, लेकिन मुझे नहीं, क्योंकि मैं काली हूं. वह परी बेहद ग़ुस्से में थी. राजा ने परी से माफी मांगी, लेकिन वह परी कहां माननेवाली थी. उसने कहा कि मैं बिना आशीर्वाद दिए नहीं जाऊंगी. राजकुमारी को अनोखा आशीर्वाद दूंगी. ये हंसी, ख़ुशी और प्रशंसा की पात्र बनेगी, लेकिन अपनी आयु के पन्द्रहवें वर्ष में राजकुमारी चरखे की सुई ख़ुद को चुभा लेगी और गिरकर मर जाएगी. काली परी ठहाके लगाती रही और उसकी बात सुनकर राजा-रानी के पैरों तले ज़मीना निकल गई. राजा ने सैनिकों को कहा कि उस चुड़ैल को पकड़ा जाए, लेकिन वह जादू से ग़ायब हो गई.
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इतने में ही बारहवीं अपना आशीर्वाद देने आगे आई, उसने कहा कि मैं इसके श्राप को हटा तो नहीं सकती, लेकिन उसे कम ज़रूर कर सकती हूं. “हे! राजकुमारी, जब तुम पंद्रह वर्ष की हो जाओगी, तो तुम मरोगी नहीं, बल्कि सौ वर्ष के लिए गहरी निद्रा में सो जाओगी.” राजा ने परी को धन्यवाद कहा, लेकिन रानी चाहती थी कि वह अपनी बेटी की शादी होते हुए देखे, लेकिन सौ वर्ष तक तो वह ज़िंदा नहीं रहेंगे. रानी ने परी से फिर आग्रह किया कि वह कुछ करे. परी ने कहा कि राजकुमारी के सोने के साथ ही महल के भी सभी लोग सो जाएंगे और वह भी सौ साल बाद राजकुमारी के साथ ही जागेंगे. सौ साल बाद राजकुमारी गहरी नींद से तब उठेगी, जब एक बहादुर और ख़ूबसूरत राजकुमार उसे चूमेगा और उसी व़क्त तुम सब भी नींद से जागोगे.
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रानी बेहद ख़ुश हुई और परी को धन्यवाद कहा. इसके बाद राजा ने सबको आज्ञा दी कि राज्य के सारे चरखों को जला दिया जाए, ताकि किसी तरह वह अपनी बच्ची को बचा सकें. देखते ही देखते बच्ची बड़ी होने लगी. सभी परियों के आशीर्वाद उस पर थे, सो वह सबकी चहेती थी और बेहद ख़ूबसूरत भी.
अब वह व़क्त आ चुका था, जब राजकुमारी की पंद्रहवीं सालगिरह नज़दीक थी. राजकुमारी की सालगिरह के दिन राजमहल को बहुत सजाया गया. बड़ी दावत दी गई, उस दिन सब कुछ अच्छा हुआ. दिन ढलते-ढलते कुछ भी बुरा नहीं हुआ. इतने में ही राजा-रानी को एक संदेश प्राप्त हआ और उन्हें ज़रूरी काम से एक दिन के लिए बाहर जाना पड़ा. रानी ने अपनी क़रीबी को राजकुमारी की ख़ास देखभाल का ज़िम्मा सौंपा और वह दोनों चले गए.
अगले दिन राजकुमारी बगीचे में खेल रही थी. खेलते-खेलते वह दूर निकल गई. कभी किसी तितली को पकड़ती, तो कभी कोई और खेल खेलती. अचानक राजकुमारी ने ख़ुद को एक बड़ी सी जर्जर गुंबदनुमा इमारत के पास पाया. वह कौतुहलवश अंदर गई, तो देखा एक बूढ़ी औरत वहाँ चरखा कात रही है. वह महिला इतनी बूढ़ी थी कि उसे यह तक पता नहीं था कि अब राज्य में चरखा नहीं रखा जाता. उसे देख राजकुमारी ने पूछा कि वह क्या कर रही है, तो बूढ़ी महिला ने कहा ये चरखा है, जिसे देख राजकुमारी विस्मित हो गई..
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राजकुमारी की उत्सुकता देख बूढ़ी महिला ने कहा कि क्या तुम यह काम करना चाहोगी? राजकुमारी तुरंत मान गई, क्योंकि राजकुमारी ने कभी भी चरखा नहीं देखा था. राजकुमारी ने जैसे ही चरखा कातना शुरू किया, उसकी नोक राजकुमारी की उंगली में चुभ गई. आख़िरकार वह श्राप पूरा हो ही गया. वह बूढ़ी दरअसल वही काली परी थी. वह ख़ुश हुई और बोली कि ये मेरे अपमान का बदला है. राजकुमारी तब तक गहरी नींद में समा चुकी थी.
जब राजा-रानी वापस आए, तो राजकुमारी कहीं नहीं थी. सब घबरा गए और राजकुमारी को ढूंढ़ने निकल पड़े. जल्द ही उन्हें राजकुमारी सोई हुई मिली. राजा-रानी यह देखकर रोने लगे कि अब सौ साल बाद ही उन्हें अपनी बेटी वापस मिलेगी. राजा ने कहा कि अब हमें समय नहीं गंवाना चाहिए. भली परी का आशीर्वाद हमें हमारी बेटी वापस दिलाएगा, लेकिन उसके लिए हमें सनशाइन को उस राजकुमार के लिए तैयार करना होगा. सभी लोग राजकुमारी को तैयार करने में लग गए. इसके लिए ख़ासतौर से शाही परियों को बुलाया गया. उसके कमरे को और बिस्तर को फूलों से, पंखों से, सोने, चांदी, हीरे-जवाहारात से सजाया गया. उस पर राजकुमारी को भी ख़ास वस्त्रों व आभूषणों से सजाकर लेटाया गया. राजकुमारी बेहद प्यारी लग रही थी.
स़फेद परी ने सूर्य देवता से आग्रह किया कि हे सूर्य देव! ये तुम्हारी ख़ास संतान है. जब यह नींद के सौ बरस पूरे कर लेगी आप अपने प्रेम के संदेशवाहक को भेजना इसे जगाने के लिए और इस राज्य को फिर से ख़ुशहाल करने के लिए. परियां महल के मुख्य द्वार पर ख़ास सुरक्षा मंत्र पढ़कर चली गई और उसके बाद हर कोई नींद की आगोश में समाता चला गया.
उस दिन तेज़ बारिश और तूफ़ान आया. पूरा महल ही बड़ी-बड़ी बेलों, कंटीले पेड़ों की आड़ में छिप गया. कई साल बीत जाने पर वह राज्य और महल स़िर्फ लोगों के किस्से-कहानियों में ही जीवित रहा. इस बीच कई नौजवान आए, लेकिन महल तक पहुंचना उनके लिए असंभव रहा.
इसी बीच एक बहादुर राजकुमार, जिसने कई राज्यों को जीता था, यह कहानी सुनकर इस सोए हुए राज्य और सोई हुई राजकुमारी को जगाने वहां पहुंचा. उसे कई लोगों ने समझाया कि वहां से कोई भी ज़िंदा वापस नहीं आ पाया और काली परी के श्राप से बचना नामुमकिन है. राजकुमार ने कहा कि सूर्य देव का आशीर्वाद हमारे साथ है और मैं उस सोई हुई सुंदरी को इस श्राप से मुक्ति दिलाऊंगा. दरसअल, सौ साल पूरे होने को थे और राजकुमारी को श्राप से मुक्ति मिलने के दिन नज़दीक थे. राजकुमार बहुत बहादुर था. वह जैसे-तैसे आंधी-तूफ़ान से लड़ते हुए महल के मुख्य द्वार के क़रीब पहुंचा. उसी व़क्त तूफ़ान रुक गया और काले बाद छंट गए. सूर्य देव प्रकट हुए. राजकुमार के रास्ते के कांटे अपने आप साफ़ होते गए और वहां फूल खिलने लगे. किले के आंगन में पहुंचकर राजकुमार ने देखा सभी सोए हुए हैं. राजकुमार भीतर गया और देखा जीवित तो सभी थे, लेकिन सभी सोए हुए थे. अंत में वह राजकुमारी के कमरे तक पहुंचा.
राजकुमारी को देखते ही वह मदहोश हो गया. इतनी ख़ूबसूरत लड़की उसने अपने जीवन में कभी नहीं देखी थी. वह उस से अपनी नज़रें ही नहीं हटा पा रहा था. राजकुमार को लगा यही उसकी जीवनसंगिनी हो सकती है. उसने सोती हुई राजकुमारी को चूमा और उसके चूमते ही श्राप टूट गया और राजकुमारी जाग गई. इसके साथ ही पूरा राज्य जाग गया. पंछी, जानवर, सिपाही सभी.
राजकुमारी भी राजकुमार को देखते ही अपना दिल दे बैठी और बोली कि मैं बरसों से तुम्हारा ही स्वप्न देख रही थी. दोनों चल कर दरबार में आए और उन्हें देखकर सभी बेहद ख़ुश हुए. सभी परियां भी वहां आ पहुंची. राजकुमारी की शादी उस राजकुमार के साथ कर दी गई, उस के बाद वह दोनों ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे. (Fairy Tale Sleeping Beauty)
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