यात्रा पर्यटन

दारमा घाटी के तेरह गांव – नरेंद्र परिहार के फोटो

उत्तराखंड प्रदेश के सीमान्त जिले पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील लम्बे समय तक भारत-तिब्बत व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रही है. इस तहसील में रं जनजाति के लोगों की बसासत है जो यहाँ की तीन घाटियों – दारमा, व्यांस और चौंदास में शताब्दियों से निवास करते आये हैं.

धारचूला से 18 किलोमीटर दूर तवाघाट नामक स्थान है जहां कालीगंगा और धौलीगंगा नदियों का संगम होता है. यदि हम कालीगंगा नदी के साथ साथ ऊपर चढ़ते जाएं तो व्यांस घाटी पहुँचते हैं और धौलीगंगा के साथ चलें तो दारमा घाटी. तीसरी अर्थात चौंदास घाटी इन दोनों के मध्य में स्थित है.

परम्परानुसार रं समाज के लोग इस मार्ग से चलने वाले भारत-तिब्बत व्यापार में एकाधिकार रखते थे. व्यापार के दौरान यहाँ के व्यापारी तकलाकोट और ग्यानिमा में मंडियों में जाकर अपने तिब्बती मित्र व्यापारियों के साथ वस्तुओं का क्रय-विक्रय किया करते थे. तिब्बत से याक के बाल, सुहागा, बकरियां, ऊन और नमक जैसा सामान लाया जाता था जबकि भारत से चीनी, गुड़ और राशन जैसी चीजें विक्रय के लिए ले जाई जाती थीं. पुरुषों के व्यापार में तिब्बत गए होने के दौरान गाँवों में रह रही महिलाएं एक फसल उगाती थीं जिसमें मुख्य रूप से कुटू और फांफर पैदा होता था. फल और सब्जियां भी पैदा किये जाते थे.

दारमा और व्यांस घाटियों के बहुत ऊंचाई पर अवस्थित होने के कारण यहाँ के निवासी सर्दियों में धारचूला और उसके आसपास की गर्म बसासतों में आ जाते थे जहाँ उनके अपने-अपने गाँवों के नियत आवास हुआ करते थे. ये आवास अब भी हैं और उन्हें खेड़े कहा जाता है.

दारमा घाटी अपने विलक्षण प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए समूचे देश में जानी जाती है और पिछले दो वर्षों से यहाँ सड़क बन जाने से पर्यटन के क्षेत्र में खासी तरक्की हुई है. हमारे अन्तरंग सहयोगी और शोधार्थी-फोटोग्राफर नरेंद्र सिंह परिहार ने हाल ही में दारमा घाटी की यात्रा की. उनके कैमरे से दारमा घाटी के सभी गाँवों की तस्वीरें पेश हैं:

सेला
चल
नंगलिंग
बालिंग
दुग्तू
दांतू
ढाकर
तीदांग

आदि बद्री मंदिर की तस्वीरें

सीपू
मारछा
गो

उत्तराखंड के सबसे गरीब गांव से तस्वीरें

फिलम
बौन
बौन

भगवती के शीतला स्वरूप को समर्पित पिथौरागढ़ का मां वरदानी मंदिर

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मूलरूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले नरेन्द्र सिंह परिहार वर्तमान में जी. बी. पन्त नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन एनवायरमेंट एंड सस्टेनबल डेवलपमेंट में रिसर्चर हैं.

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