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हम फिर से उसी थकान से भर जाते हैं

किसी को जानो तो बस इतना ही जानना कि कोई और भी दिखे तो उसके होने का भ्रम होता रहे…

7 years ago

हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 57

यूसुफ साहब बताते हैं कि उन्होंने बचपन में अपने बुजुर्गों से रामगढ़, नथुवाखान, बागेश्वर इत्यादि नाम सुने थे. इन जगहों…

7 years ago

अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 11

गुडी गुडी डेज़ (हीरामन- हीराबाई संवाद; नाम में क्या रक्खा है) अमित श्रीवास्तव हीराबाई- हीराबाई हीरामन- हीरामन हीराबाई- आह! हीरा!…

7 years ago

आजादी से पहले उत्तराखण्ड में वन आन्दोलन

वन आन्दोलन 1920-21 तक बेगार आन्दोलन का पूरक हो गया था. इन आन्दोलनों के व्यापक सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा…

7 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 55

  पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम…

7 years ago

सर्दियों का बिनसर

सर्दियों की ऋतु हो और आप बिनसर में हों तो क्या कहने! बिनसर की शामों की सोने सी रोशनी, रात के आसमान…

7 years ago

मेहमान बनने का शौक

उसे जान-पहचान में मेहमान बनने का बहुत शौक था. वह इतना भी जरूरी नहीं समझता था कि जान-पहचान बहुत गहरी…

7 years ago

हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 56

हल्द्वानी के बरेली रोड में आज भी अब्दुल्ला बिल्डिंग विख्यात है. इसके बारे में माजिद साहब बताते हैं कि उनका…

7 years ago

कहो देबी, कथा कहो – 20

निर्माण के दिन वर्ष भर बाद 1970 में ‘किसान भारती’ मासिक के संपादक रमेश दत्त शर्मा के विश्वविद्यालय छोड़ देने…

7 years ago

मुनस्यारी से ‘बूंद’ की आवाज और धुन

पिछले एक साल से मुनस्यारी के तीन लड़के नवनीत, नवल और लवराज 'बूंद' गीत पर मेहनत कर रहे हैं. इस…

7 years ago