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गौलापार में दिग्गजों के बीच यूं ही नहीं चमका रवि

सफलता की कहानी यूं ही नहीं लिखी जाती. ईमानदारी से किए गए संघर्ष  और कड़ी मेहनत ही सफलता की कहानी…

7 years ago

फ्वां बाघा रे वाले खतरनाक नरभक्षी बाघ की असल रोमांचक दास्तान

आजकल पहाड़ों में ही नहीं देश-विदेश में “फ्वां बाघा रे” गीत की बहुत चर्चा है. यह गीत इतिहास की  एक…

7 years ago

धन की देवी का वाहन और मृत्यु का सूचक एक ही जीव कैसे हो सकता है

होशियारी की मिसाल होते हैं. इंग्लैण्ड-अमेरिका में. विश्वास न हो तो उनके साहित्यकोश की तलाशी ले लो. एज़ वाइज़ एज़…

7 years ago

कहां गया हमारे पहाड़ का चुआ

अब तो भूले-बिसरे ही याद आता है हमें रामदाना. उपवास के लिए लोग इसके लड्डू और पट्टी खोजते हैं. पहले…

7 years ago

पुलिस कर्मियों की त्रासद मृत्यु तक को मखौल में बदल देता है सोशल मीडिया

[हाल में नैनीताल के बीरभट्टी के समीप हुए हादसे में दिवंगत हुए पुलिसकर्मियों को लेकर सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों…

7 years ago

मसाण, आंचरी, खबीस और ऐड़ी : कुमाऊं-गढ़वाल में निवास करने वाली पारलौकिक शक्तियां

मृत्यु के बाद आदमी कहां जाता है? इस प्रश्न ने मानव सभ्यता को हजारों सालों से असमंजस में डाला है.…

7 years ago

‘तीलै धारू बोला’ कहीं उत्तराखण्डी महिलाओं की व्यथा-कथा तो नहीं?

जब से हमने होश संभाला, कुमांऊनी का गाना – ‘चैकोटकि पारबती तीलै धारू बोला बली, तीलै धारू बोला’ अथवा ‘ओ…

7 years ago

भातरोजखान के थानाध्यक्ष नीरज भाकुनी की अपील पर अपने मृत साथियों का जिम्मा स्वयं उठाया उत्तराखंड पुलिसकर्मियों ने

2 दिन पूर्व हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए सिपाही ललित मोहन व नंदन सिंह की मृत्यु के उपरांत थाना…

7 years ago

मारे गए पुलिसवालों के परिवारों को क्राउड फंडिंग के सहारे छोड़ देना क्या खुद सरकार की बदनामी नहीं है

एक उपन्यास की यह  पंक्तियां हैं – “पुलिस कर्मचारी की एक हसरत रहती है कि वह सम्मान से जिए और…

7 years ago

गंगोलीहाट की डॉ. सविता जोशी जो गुड़गांव में गेरु और बिस्वार से ऐपण बना कर देश और दुनिया में अपनी संस्कृति को लोकप्रिय बना रही हैं

ऐपण हमारी परवरिश का एक हिस्सा रहा है जो बाद में केवल महिलाओं और लड़कियों तक सीमित रह गया. ऐपण…

7 years ago