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उत्तराखण्ड की लोककथा : ब्रह्मकमल

बहुत समय पहले की बात है. कहते हैं कि उस समय परी लोक की परियाँ धरती पर आती थीं. यहाँ…

4 years ago

बिच्छू घास की पत्तियों को 5000 से 9000 रुपये तक की रकम चुकाकर क्यों खरीदते हैं लोग

पहाड़ों में सिन्ना या बिच्छू घास हिकारत की नजर से ही देखा गया या उससे डरकर दूरी ही बनाई गयी.…

4 years ago

आज जयानंद भारती का जन्मदिन है

स्वाधीनता संग्रामी, डोला-पालकी और आर्यसमाज आन्दोलन के अग्रणी ‘जयानंद भारती’ का जन्म ग्राम- अरकंडाई, पट्टी- साबली (बीरोंखाल), पौड़ी (गढ़वाल) में…

4 years ago

कौवों और उल्लुओं की लड़ाई: एक कहानी पंचतंत्र से

दक्षिण देश में महिलारोप्य नाम का एक नगर था. नगर के पास एक बड़ा पीपल का पेड़ था. उसके घने…

4 years ago

स्वदेशी का प्रतीक ‘बागेश्वरी चरखा’ अब केवल इतिहास की बात रह चुका है

यह हिमालयी राज्यों का दुर्भाग्य रहा है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनके योगदान को उचित स्थान नहीं…

4 years ago

पहाड़ी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं ‘पहाड़ के फौजी’

हमारे पहाड़ की एक चीज ऐसी है जिसे पहाड़ी सस्कृति का ही एक अभिन्न अंग कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं…

4 years ago

अल्मोड़ा हुक्का क्लब में रामलीला की तस्वीरें

हुक्का क्लब 1930 से प्रतिवर्ष अल्मोड़ा में रामलीला का आयोजन करता आ रहा है. इस विश्व प्रसिद्ध रामलीला के 2021 के…

4 years ago

कुमाऊं की रामलीला का विस्तृत इतिहास

सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई इलाकों में अनेक पर्व और…

4 years ago

जिनके बिना अधूरा है पिथौरागढ़ में ‘टकाना की रामलीला’ इतिहास

टकाना रामलीला का प्रारम्भ से अब तक का सफर व मंचन बहुत ही सुन्दर, सराहनीय और लोकप्रिय रहा है. हमेशा…

4 years ago

कुमाऊं की रामलीला पर ‘गिर्दा’ का एक महत्वपूर्ण लेख

कुमाऊॅं (उत्तराखण्ड) में प्रचलित रामलीला सम्भवतः संसार का एक मात्र ऐसा गीत नाट्य है जो ग्यारह दिनों तक लगातार क्रमशः…

4 years ago