इतिहास

दुश्मनों को धूल चटाने वाली बाबर की नानी ‘ईसान दौलत खानम’दुश्मनों को धूल चटाने वाली बाबर की नानी ‘ईसान दौलत खानम’

दुश्मनों को धूल चटाने वाली बाबर की नानी ‘ईसान दौलत खानम’

बात 1470 के आस-पास की है, दश्त-ए-किप्चाक (तुर्किस्तान) में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही थी. हाल ही में दश्त-ए-किप्चाक ने अपना…

3 years ago
कोट: उत्तराखंड में राजा महाराजाओं के प्राचीन किलेकोट: उत्तराखंड में राजा महाराजाओं के प्राचीन किले

कोट: उत्तराखंड में राजा महाराजाओं के प्राचीन किले

उत्तराखंड के कुमाऊं, गढ़वाल में बहुत से गाँव और ऐसी जगहें हैं जिनके पीछे “कोट” शब्द आता है. जिन गाँव…

4 years ago
जब ‘सुल्ताना डाकू’ पर भरोसा कर हल्द्वानी के लाला ने उसे अपनी तिजोरी की चाबी दे दीजब ‘सुल्ताना डाकू’ पर भरोसा कर हल्द्वानी के लाला ने उसे अपनी तिजोरी की चाबी दे दी

जब ‘सुल्ताना डाकू’ पर भरोसा कर हल्द्वानी के लाला ने उसे अपनी तिजोरी की चाबी दे दी

कहा जाता है कि पुराने जमाने में भाबर के इस इलाके में डकैतों के भी अड्डे हुआ करते थे. सुल्ताना…

4 years ago
देहरादून का अफगान कनेक्शनदेहरादून का अफगान कनेक्शन

देहरादून का अफगान कनेक्शन

देहरादून और अफगानिस्तान का संबंध पहले आंग्ल-अफगान युद्ध से जुड़ा है. इस युद्ध के बाद अमीर दोस्त मोहम्मद खान (अफगानिस्तान…

4 years ago
उत्तराखंड के इतिहास में 6 सितम्बर का महत्वउत्तराखंड के इतिहास में 6 सितम्बर का महत्व

उत्तराखंड के इतिहास में 6 सितम्बर का महत्व

गो-बेक मेलकम हैली, भारत माता की जयहाथ में तिरंगा उठा, नारे भी गूंज उठे,भाग चला, लाट निज साथियों की रेल…

4 years ago
डोला पालकी आंदोलनडोला पालकी आंदोलन

डोला पालकी आंदोलन

 उत्तराखण्ड का डोला पालकी आंदोलन आधुनिक भारतीय इतिहास में निम्न जाति उत्थान आंदोलनों का ही एक रूप रहा. भारतीय समाज…

4 years ago
उत्तराखंड के इतिहास में काला दिन है 1 सितम्बरउत्तराखंड के इतिहास में काला दिन है 1 सितम्बर

उत्तराखंड के इतिहास में काला दिन है 1 सितम्बर

1 सितम्बर, 1994 की सुबह खटीमा में हमेशा की तरह एक सामान्य सुबह की तरह शुरू हुई. लोगों ने अपनी…

4 years ago
अफ़गान बादशाह जो देहरादून में ‘बासमती चावल’ लायाअफ़गान बादशाह जो देहरादून में ‘बासमती चावल’ लाया

अफ़गान बादशाह जो देहरादून में ‘बासमती चावल’ लाया

‘देहरादून की बासमती’ सुनते ही मुंह में खुशबू, मिठास और कोमल चावल के दानों के स्वाद से भर जाता है…

4 years ago
सालम के वीरों ने अपने हौसले और खून से लिखी क्रांति की भूमिकासालम के वीरों ने अपने हौसले और खून से लिखी क्रांति की भूमिका

सालम के वीरों ने अपने हौसले और खून से लिखी क्रांति की भूमिका

1942 का साल था महिना अगस्त का. अंग्रेजों के खिलाफ़ विरोध की चिंगारियां अब गाँवों में विरोध की लपटों के…

4 years ago
आखिर क्यों भूल गये हम ‘कालू महर’ कोआखिर क्यों भूल गये हम ‘कालू महर’ को

आखिर क्यों भूल गये हम ‘कालू महर’ को

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में उत्तराखण्ड के काली कुमाऊं यानि वर्तमान चम्पावत जनपद का अप्रतिम योगदान रहा है. स्थानीय जन इतिहास…

4 years ago