उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. चर्चा में आने कारण कोई आपराधिक घटना…
वेशभूषा से किसी भी इलाके के स्थानीय निवासियों की पहचान होती है. ये वेशभूषाएं पारंपरिक तौर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहनी जाती…
‘किस खेत की मूली’ (कमजोर या अधिकारविहीन, ‘मूली-गाजर समझना’ (कमजोर) और ‘खाली मूली में’ (व्यर्थ में) जैसी लोकोक्तियां अथवा वाक्यांश…
नाम तो उनका अब्दुल हई था मगर दिलवालियाँ उन्हें प्यार से 'हाय' कहा करती थीं. वो थे भी सर से…
स्कूल में कॉलेज के लड़कों और महिलाओं के जुलूस के जत्थे आने की धुंधली तस्वीरें याद हैं. दूर से आती…
काव्य कला का सौष्ठव उसके सब कुछ कह देने में नहीं, बल्कि, अनकहे अंश में है. जैसे अपने पति का…
आंचलिक भाषा मेंमांगलिक गीत गाते हुएवे रोपती हैंज़िदगी की जड़ें पानी में रंग-बिरंगी पोशाकेंमाटी में सने हाथजैसेपिघले सोने में सने…
यह जनवरी 1974, का वाकिया है जब प्रसिद्ध गांधीवादी सर्वोदय कार्यकर्ता श्री सुंदरलाल बहुगुणा उत्तराखंड में अपनी 127 दिवसीय 1500…
भारत के प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ राजतरंगिणी के रचियता कल्हण ने ठीक ही कहा है— श्लाध्यः स एव गुणवान् रागद्वेष बहिष्कृता भूतार्थकथने…
शेखर उस पहाड़ी से उतरता हुआ चला जा रहा था. उसके क़दम अपनी अभ्यस्त साधारण गति से पड़ रहे थे,…