4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 42 (Column by Gayatree arya 42) पिछली किस्त का लिंक: तुम्हारे बारे में…
हम होंगे सिनला पार एक दिन – 3 हमारे पास समय था तो नदी पार दारचूला जाने की योजना बनी.…
औपनिवेशिक मूल्यों की तलछट पर बिछा एक लाचार समाज भारत को आज़ादी तो 1947 में मिल चुकी थी; मगर आज…
इस बात में शायद ही दो राय हो कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में अर्थव्यवस्था की रीढ़ यहां की महिलायें…
हम होंगे सिनला पार एक दिन - 2 वैन आगे बढ़ी तो मन में दारमा-व्यास की रहस्यमयी घाटियों की अनदेखी…
ठंड से ठिठुरते पहाड़ में लकदक पड़ी बरफ पिघलती है तो जबरदस्त कुड़कुड़ाट होता है. ह्युं पड़ते बखत तो चारों…
हमारे पहाड़ों में सभी लोग संक्रांत कोई त्यौहार में पूरे गांव बाखली में दो-दो पूरी और एक बड़ा (पैड) देने…
पहाड़ और मेरा जीवन – 66 (पिछली क़िस्त: वो शेर ओ शायरी, वो कविता और वो बाबा नागार्जुन का शहर…
बताया जाता है कि पांडव जब स्वार्गारोहण को जा रहे थे तो इस स्थान पर लम्बे वक़्त के लिए रुक…
रात के लगभग 10 बज रहे थे. एक मित्र का जन्मदिन मनाने के बाद मैं अपनी बाइक लेकर श्रीनगर के…