जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम, वो फिर नहीं आते... इस गीत को सुनकर संवेदी श्रोता अनायास…
1955-56 की एक काव्य संध्या में देव साहब ने नीरज को सुना. उनकी कविता उन्हें इतनी भायी कि उन्होंने नीरज…
तटस्थता और पारदर्शिता, किसी भी व्यवस्था के सबसे लोकप्रिय सिद्धांत माने जाते है, जिसके चलते अक्सर चुनाव जैसे खास आयोजनों…
जब दीप जले आना जब शाम ढले आना संदेश मिलन का भूल न जाना मेरा प्यार न बिसराना जब दीप…
एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले जिंदगी और बता तेरा…
रुला के गया सपना मेरा बैठी हूँ कब हो सवेरा वही है गमे दिल वही है चंदा तारे वही हम…
छह-सात दशक पहले, हिंदी सिनेमा में रोमानी उत्थान के गीतों की जो धारा बहनी शुरू हुई, लंबे अरसे तक उनका…
क्वीन ऑफ़ बांग्ला पॉप के नाम से मशहूर रूना लैला, बॉलीवुड में एक ताजा हवा के झोंके सी आईं. उनका…
लोकभाषा में उनका उपनाम 'चाखलू' था, तो देवनागरी में 'पखेरू'. दोनों नाम समानार्थी बताए जाते थे. भयंकर लिक्खाड़ थे. सिंगल…
दूरदर्शन के ध्वनि-संकेत के साथ, सबका अपना-अपना काम-धाम छोड़कर टेलीविजन सेट के आगे बैठ जाना. मोहल्ले का मोहल्ला यानी समूचा…