कला साहित्य

शेरदा ‘अनपढ़’ की कविता मुर्दाक बयान

https://www.youtube.com/embed/pU4wsqxMyE0 जब तलक बैठुल कुनैछी, बट्यावौ- बट्यावौ है गेपराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे(Sherda Anpadh Poem) जो दिन…

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एक कर्मयोगी के जीवन और जीविका की शानदार दांस्ता: काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि

ओशो कहते हैं कि ‘संतान कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाए, अपने माता-पिता से बड़ी कभी नहीं हो सकती.’…

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मां आज भी सभी सिक्कों को डॉलर ही कहती है

ब्रह्म ने पृथ्वी के कान में एक बीज मंत्र दे दिया हैउसी क्रिया की प्रतिक्रिया मेंजब बादल बरसते हैं,तो स्नेह…

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गोविन्द वल्लभ पन्त की कहानी ‘फटा पत्र’

प्रजापति और मास्टरों के घंटों में इतनी शरारत नहीं करता था, जितनी पंडित श्रानंदरन साहित्य-शास्त्रीजी के घंटे में. वे जब…

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पहाड़ के गांवों में नाचने वाली ‘रफल्ला’ के जीवन की कहानी

फागुन के आखिरी दिनों में रफल्ला, गाँव के नजदीक के गधेरे में अपना घाघरा धो रही है. बसंत इन दिनों…

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देहरादून में रहने वाले बारह साल के बच्चे की दूसरी किताब

अमरीका के सबसे ज़्यादा बिकने वाले समकालीन लेखकों में से एक क्रिस्टोफ़र पॉलीनि अब सैंतीस साल के हैं. जब उनकी…

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शेरदा अनपढ़ और नरेन्द्र सिंह नेगी की जनप्रतिनिधियों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी

लगभग चौबीस सौ साल पहले जन्मे महान दार्शनिक अरस्तु द्वारा शासन सम्बन्धी व्यवस्था पर प्रतिपादित अपने तीन वर्गीकरण में से…

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दो सौ वर्षों के इतिहास को समेटे एक पुस्तक ‘काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि’

जिस राष्ट्र में यह कहा जाता हो कि “तीन कोस पर पानी बदले, नौ कोस पर बोली”, जहाँ हर प्रकार…

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पुन्यों सी उजली देबुली और नरिया के जीवन की एक झलक

छिलुके की रोशनी में चौथर का कोना कोना खिल उठा था. कई महीनों बाद दो दिन पहले ही चौथर लिपा…

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ऋषि गंगा के मायके में : 1934 का यात्रा वृतांत

एवरेस्ट अभियान से लौटने के कुछ महीनों के बाद ई. ई. सिम्पसन ने मुझे गढ़वाल के एक छोटे अभियान का…

5 years ago