कला साहित्य

माँ! मैं बस लिख देना चाहती हूं- तुम्हारे नाम

आज दिसंबर की शुरुआत हो रही है और साल 2025 अपने आखिरी दिनों की तरफ बढ़ रहा है. पेड़ों के…

2 months ago

लिखो कि हिम्मत सिंह के साथ कदम-कदम पर अन्याय हो रहा है !

".. बहुत हुआ हे इष्ट देबो, जिन्होंने मेरे परिवार के साथ अन्याय किया, उनको अब तू ही समझना... गोल्ज्यू मेरा…

2 months ago

मां, हम हँस क्यों नहीं सकते?

"मां, मेरे लिए सुधा मूर्ति की बुक आर्डर कर दो" बेटी भीतर आते ही बोली. "कभी अपने स्कूल की किताबें…

3 months ago

जादुई बकरी की कहानी

बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक राजा और उसकी रानी रहते थे. उनकी एक ही बेटी…

3 months ago

जंगली बेर वाली लड़की ‘शायद’ पुष्पा

मुझे याद है जब मैं सातवीं कक्षा में थी. तब मेरी क्लास में एक लड़की पढ़ती थी. जिसका नाम "शायद"…

11 months ago

तख़्ते : उमेश तिवारी ‘विश्वास’ की कहानी

सुबह का आसमान बादलों से ढका है, आम दिनों से काफ़ी कम आमदोरफ़्त है सड़क पर. दूर नज़र आती छोटा…

12 months ago

चेरी ब्लॉसम और वसंत

यहाँ धूप नहीं आती बस छाया है खिड़की के कोने से जो रोशनी आती है उस रोशनी में धूल के…

12 months ago

ऐपण बनाकर लोक संस्कृति को जीवित किया

छोटी मुखानी में हुई ऐपण प्रतियोगिता पर्वतीय लोक संस्कृति ऐपण कला को संरक्षित व उसको बढ़ाने के उद्देश्य से छोटी…

1 year ago

कफ़न चोर: धर्मवीर भारती की लघुकथा

सकीना की बुख़ार से जलती हुई पलकों पर एक आंसू चू पड़ा. (Kafan Chor Hindi Story By Dharmveer Bharti) “अब्बा!” सकीना ने…

1 year ago

कहानी : फर्क

राकेश ने बस स्टेशन पहुँच कर टिकट काउंटर से टिकट लिया, हालाँकि टिकट लेने में उसे खासी परेशानी उठानी पड़ी…

1 year ago