समाज

काली कुमाऊं के वीर भ्यूंराज की मार्मिक कथा

घटना कुमाऊं के अंतिम चंद राजा मोहन चंद के काल (सन् 1777 से 1788 ई.) की है. इस समय कुमाऊं…

5 years ago

एक सरकारी स्कूल की सच्ची कहानी जिसकी दीवारों पर बच्चों ने अपने सपने रंगे हैं

एक स्कूल हो ऐसा जिसका हर कोना इतना सुंदर हो कि उससे बाहर जाने का मन ही न हो. ये…

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घाम पानी: बिना कमला-बिमला के एक कुमाऊनी प्रेम गीत

चांदनी एंटरप्राइजेज के यूट्यूब चैनल पर मुनस्यारी के लवराज टोलिया का लिखा घाम-पानी गाना रिलीज हो चुका है. घाम-पानी एक प्रेम…

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जोश्याणी कांड: राजगद्दी के लिये जब एक भाई ने अपनी ही राजधानी लुटवा दी

1780 का साल रहा होगा. गढ़वाल और कुमाऊं दोनों जगह राजगद्दी को लेकर आंतरिक संघर्ष जारी था. कुमाऊं में ललितशाह…

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शौर्य गाथा: उत्तराखण्ड की मिट्टी से बना नए साल का कैलेंडर

उत्तराखंड के अतीत, वर्तमान से जुड़ी गौरव गाथाएं उत्तराखण्ड की नई पीढ़ी तक पहुंचाना बहुत जरुरी है. उन्हें उनके पूर्वजों…

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मेल-मिलाप पसन्द प्रताप भैया का अनमेल व्यक्तित्व: जन्मदिन विशेष

प्रताप भैया यदि हमारे बीच होते तो 88 वर्ष आज के दिन पूरे करते. दस वर्ष पूर्व संसार से विदा…

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एक आमा की सलाह पर पुरखू ने सीरागढ़ किले पर क़ब्ज़ा किया

डोटी की राजकुमारी रुद्रचंद की मां ने तोहफे में अपने भाई से सीरा मांगा, लेकिन भाई ने उसे देने से…

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सिद्धों व सन्तों की तपोभूमि भी रहा भवाली क्षेत्र

भवाली, कुमाऊं क्षेत्र का प्रवेश द्वार होने के कारण देश के दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले परिब्राजक बद्रीनाथ, केदारनाथ…

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अंतिम चंद शासक महेन्द्र चंद और गोरखा आक्रमण

महेन्द्रचंद (1788-91) चंद राजवंश का अंतिम शासक था. सन् 1791 में गोरखों के साथ हुए हवालबाग युद्ध पराजित होकर कुमाऊँ…

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मन्दाकिनी घाटी में कही जाने वाली कालिदास और रेवती की प्रेम कहानी

केदार घाटी का गाँव 'आश्रम'. यहीं परमेश्वरानन्द और उनकी सती-साध्वी पत्नी पार्वती रहती थी. सुबह-शाम अपने इष्टदेव की आराधना करते…

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