कला साहित्य

भोलाराम का जीव : हरिशंकर परसाई

ऐसा कभी नहीं हुआ था… धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश  के आधार पर स्वर्ग या…

5 years ago

पहाड़ी लोकजीवन को जानने-समझने की बेहतरीन पुस्तक: मेरी यादों का पहाड़

हमारा समाज विविधताओं से भरा है, उतनी ही अनोखी हैं, हर क्षेत्र की लोकसंस्कृति व लोकपरम्पराऐं. कमोवेश प्रत्येक लोकजीवन की…

5 years ago

‘मेरा भी कोई होता’ एक सीधी-सादी पहाड़न की कहानी

आग जलाने के लिए चूल्हे में फूंक मार-मारकर सुशीला की आंखें लाल हो गई थीं. कमरा धुएं से भर गया…

5 years ago

मुझे पतंग उड़ाना सीख लेना चाहिए था

बहुत दूर तक नहीं जाती थी पतंग मेरीपश्चिम को बहती हवा अगरदो कलाइयां मारकर गिर जातीशिशू के आंगन, अनाथालय की…

5 years ago

कहानी : याद

सूरज धीरे-धीरे पहाड़ी के सिर पर से अपना आँचल समेट कर पल भर को ठिठका. गहरे नीले और काले आँचल…

5 years ago

एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना : अमृता प्रीतम

पालक एक आने गठ्ठी, टमाटर छह आने रत्तल और हरी मिर्चें एक आने की ढेरी "पता नहीं तरकारी बेचनेवाली स्त्री…

5 years ago

कहानी : मोतिया

चीड़ के पेड़ कब के पीछे छूट गये थे और अब तो ठंडी हवा और सर्पीली सड़क भी गुम हो…

5 years ago

प्रेमचंद की कहानी ‘सुहाग की साड़ी’

यह कहना भूल है कि दाम्पत्य-सुख के लिए स्त्री-पुरुष के स्वभाव में मेल होना आवश्यक है. श्रीमती गौरा और श्रीमान्…

5 years ago

गर्जना और विद्युत की कहानी

बहुत समय पहले गर्जना (बादलों की आवाज़) और विद्युत (आकाशीय बिजली) बाक़ी सभी लोगों के साथ धरती पर ही रहा…

5 years ago

माँ बनने की बात पर ख़ुश हो या दुःखी पीहू समझ न पायी

पीहू एक बहुत ही सुलझी हुई, समझदार, खूबसूरत और होशियार बच्ची थी और अपने माता-पिता की इकलौती सन्तान भी. बचपन…

5 years ago