साभार /hindi.sportskeeda.comफोटो
भारत की स्टार महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने 18वें एशियन गेम्स में सोमवार को महिला एकल के सेमीफाइनल मुकाबले में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. हालांकि सायना नेहवाल को 18वें एशियाई खेलों में सोमवार को महिला एकल के सेमीफाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा है. लेकिन उन्होंने भारत को 36 साल बाद बैडमिंटन में कोई पदक दिलाया है. इस हार के साथ ही वह फाइनल में प्रवेश से भी चूक गईं. उन्हें कांस्य पदक हासिल हुआ है. सायना का एशियाई खेलों में यह पहला पदक है.
सेमीफाइनल में साइना को चीनी ताइपे की खिलाड़ी ताई जु यिंग से सीधे गेमों में 21-17, 21-14 में हार का सामना करना पड़ा. पहले राउंड में यिंग कुछ गलत शॉट खेल बैठीं और सायना ने इसक फायदा उठाते हुए अपना स्कोर चीनी ताइपे की खिलाड़ी के खिलाफ 10-10 से बराबर कर लिया लिया,लेकिन इसका कोई खास फायदा साइन को नहीं हो सका. खेल के दुसरे राउंड में दोनों खिलाड़ियों को एक-दूसरे को बराबर की टक्कर देते दिखे, लेकिन यिंग ने इस पर अच्छी वापसी की ओर सायना को 21-14 से हराकर फाइनल में जगह बनाई. साइना का एशियाड में एकल स्पर्धा में यह पहला पदक है. उन्होंने 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में महिला टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. साइना और ताई जू युंग के बीच अब तक 17 मुकाबले हुए. इनमें साइना 5 और युंग 12 जीतने में सफल रहीं. साइना नवंबर 2014 के बाद से युंग के खिलाफ कोई मुकाबला नहीं जीत सकी हैं.
वहीं दूसरी ओर पीवी सिंधु ने 18वें एशियाई खेलों में सोमवार को बैडमिंटन के सेमीफाइनल में जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 15-21, 21-10 से हरा दिया. एशियाड में बैडमिंटन के 56 साल के इतिहास में खिताबी मुकाबले में जगह बनाने वाली पहली भारतीय है. फाइनल में सिंधु का मुकाबला चीनी ताइपे की ताई जू युंग से होगा. भारत ने अभी तक 18वें एशियन गेम्स में 30 से अधिक पदक जीते लिए हैं. सबसे अधिक पदकों की रेस में वह अभी सातवें स्थान पर बना हुआ है.चीन अभी तक सौ से अधिक पदक जीत चुका है. दुसरे स्थान पर जापान बना हुआ है.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…
पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…
पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…
ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…
उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…
पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…