हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 22

8 years ago

सन् 60-70 के दशक में साम्यवादी विचारधारा के नाम पर बहुत से पाजी लोगों का जमघट मैंने यहां देखा. वे…

पहाड़ और मेरा बचपन – 5

8 years ago

पिछली क़िस्त - पहाड़ और मेरा बचपन – 4 गांव में उन बहुत बचपन के दिनों के बाद मुझे दिल्ली…

अक्लमंद सियार की कहानी

8 years ago

अफ्रीकी लोक कथाएँ – 8 “सुनो, सुनो, सुनो, मेरे बच्चो,” एक शाम गोगो ने बोलना शुरू किया. “जानते हो न,…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 8

8 years ago

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

रेडियो पर पहली लाइव क्रिकेट कमेंट्री एक पादरी ने की थी

8 years ago

बीबीसी को इस क्षेत्र में पायनियर का दर्ज़ा इस लिहाज़ से हासिल है कि 14 मई 1927 को चर्च में…

गंगा की धारा और लोगों की ज़िंदगियां

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गंगा के उद्गम गोमुख और गंगोत्री से कुछ किलोमीटर नीचे उत्तरकाशी की तरफ़ यानी डाउनस्ट्रीम, तीन अहम जलबिजली परियोजनाएं थीं.…

उत्तराखण्ड में सावन में मनाया जाने वाला लोकपर्व बैसी

8 years ago

बैसी उत्तराखण्ड में सावन के महीने में 22 दिनों तक मनाया जाने वाला लोकपर्व है. यह त्यौहार खरीफ की फसल…

सियारों को जूठन में पलने का श्राप

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कथाएं लगाने और सुनने सुनाने की कोइ उम्र नहीं होती. तो लीजिये मेरी कथा लगाने की, सुनने की कड़ी में…

उसका विवेक फांसी के लीवर की तरह होता है

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हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ - 7 अस्सी के दशक में समकालीन कविता में जिन महत्वपूर्ण कवियों ने पहचान बनायी…

मैं ही मैं हूँ, मैं ही सूर्य हूँ, मैं ही मनु…

8 years ago

कॉलेज के दिन थे. रंगीन रुमाल मे इत्र के फाहे रखने की उम्र थी. तो दूसरी तरफ परंपरा-विद्रोह की अवस्था.…