संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार आज से

संयुक्त मोर्चा ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है. प्रदेश भर में सांकेतिक प्रदर्शन के बाद आज से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. इस दौरान देहरादून के अलावा हर जिले में कर्मचारी धरना करेंगे. प्रदेश के लगभग 27 विभागों के कार्मिक अपनी मांगों को लेकर सरकार से कई दौर की वार्ता कर चुका है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है.

कार्मिकों ने कहा कि पूरी सेवा में हर कर्मी को तीन प्रमोशन, पूर्व की भांति एसीपी का लाभ, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को तीसरी एसीपी के रूप में 4200 ग्रेड-पे, सातवें वेतनमान के तहत सभी वेतन-भत्तों का लाभ,सभी निगमों को सातवें वेतनमान के बकाया एरियर, वेतन विसंगति का निस्तारण मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हो, उपनल, आउटसोर्स, पीटीसी, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण और तब तक न्यूनतम 15 से 28 हजार तक वेतन भुगतान, यू हेल्थ कार्ड का लाभ राजकीय कर्मचारियों की तरह प्रदेश के शेष सभी कर्मचारियों को दिया जाए आदि, शिक्षकों व कर्मचारियों को वाहन भत्ते का लाभ, वेतन समिति की पुनर्गठन रिपोर्ट को निरस्त किया जाए, जिला पंचायत कर्मचारियों को राजकीय कर्मचारी घोषित किया जाए, वाहन चालकों के लिए स्टापिंग पैटर्न के तहत प्रोन्नत वेतनमान ग्रेड वेतन व्यवस्था संशोधित करते हुए पूर्व की तरह की जाए, तबादला एक्ट में 50 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी महिला कर्मचारियों को छूट दी जाए, पुरानी पेंशन का लाभ सभी कर्मचारियों को पूर्व की भांति दिया जाए.

मोर्चा में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, राज्य निगम कर्मचारी महासंघ, उत्तराखंड सचिवालय संघ, राजकीय शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, अशासकीय माध्यमिक शिक्षकोत्तर महासंघ, वन कर्मचारी महासंघ, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महासंघ, उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा, रोडवेज अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, निकाय कर्मचारी महासंघ, राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ, अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संगठन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ, उपनल कर्मचारी संघ शामिल हैं.

सरकार का तर्क है कि राज्य के आर्थिक हालात ऐसे नहीं हैं कि कर्मचारियों की सभी मांगें पूरी की जा सकें. माना जा रहा है कि यह एक बड़ा कर्मचारी आंदोलन का आगाज हो गया है. ऐसा कोई कर्मचारी संगठन नहीं बचा है जो आंदोलन में शरीक न हो. कर्मचारियों के तेवर भी यूं ही तल्ख नहीं हैं. कर्मचारियों ने सोची समझी रणनीति के तहत आंदोलन के लिए यह वक्त चुना है. जल्द ही प्रदेश में निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं. उधर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हड़ताल को स्थायी समाधान न बताते हुए, कर्मचारियों को भरोसा दिलाया की सरकार उनकें हितों के प्रति कार्य कर रही है.

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