Featured

बेमौसम बारिश से चौखुटिया में भारी तबाही की तस्वीरें

उत्तराखण्ड में कुमाऊं मंडल के चौखुटिया में आज भारी बारिश के बाद मची तबाही ने स्थानीय लोगों के बीच दहशत पैदा कर दी. गर्मियों में मौसम में हुई इस भीषण बारिश से चौखुटिया के प्रभावित क्षेत्र में गेंहू की खड़ी फसल बह गयी. ब्लॉक चाखुटिया या जिला अल्मोड़ा गांव चित्रेश्वर के आसपास भारी बारिश हुई है.
(Unseasonal Rains Cause Massive Destruction in Chaukhutiya)

स्थानीय किसान अरविन्द कांडपाल के अनुसार कुथाड़ गधेरे में अचानक आये उफान से सिरोडी, बगड़ी, भटकोट, गनाई, बाखली आदि गांवों के घरों और खेतों में पानी भर गया. इस गधेरे में साल भर लगातार पानी नहीं बहता. बरसात के मौसम में इसमें बहने वाला पानी रामगंगा नदी में जाकर मिल जाता है.

अब तक इस सैलाब में एक बाइक और एक कार के बहने की सूचना है. घरों में पानी घुसने से कई ग्रामीणों का घरेलू सामान खराब हो गया है. इसके कुछ पालतू पशु भी इस तबाही में मारे गए. हाल ही मैं फसल कटी होने की वजह से खेत खाली थे जिस वजह से फसल का नुकसान नहीं हुआ. इस भारी बारिश में हल्द्वानी-रानीखेत-गैरसैंण मार्ग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. इस महत्वपूर्ण मार्ग को ठीक करने के लिए प्रशासन ने अपना पूरा जोर लगा दिया है.(Unseasonal Rains Cause Massive Destruction in Chaukhutiya)

गौरतलब है कि आज डेढ़ घंटे की मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के बाद यह तबाही हुई. पिछले चार-पांच दिनों से इस इलाके में लगातार थोड़ा बहुत बारिश हो रही थी. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले इस क्षेत्र में इतनी बारिश और उससे मची तबाही नहीं देखी गयी. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.

तस्वीरों में इस आफत एक बाद की तस्वीरें देखिये :

      

 

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

1 week ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

1 week ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

1 week ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

1 week ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

1 week ago