Dharmendra

हल्द्वानी में यादों की बरात और शेट्टी की खोपड़ीहल्द्वानी में यादों की बरात और शेट्टी की खोपड़ी

हल्द्वानी में यादों की बरात और शेट्टी की खोपड़ी

नाहिद में 'यादों की बारात' लगी थी. जमाने के टाइम के तकाज़े के हिसाब से हम चार दोस्त जीनातमान के…

6 years ago
बासु चटर्जी की फिल्म दिल्लगी: सूक्ष्म मनोविज्ञान की गहरी पकड़बासु चटर्जी की फिल्म दिल्लगी: सूक्ष्म मनोविज्ञान की गहरी पकड़

बासु चटर्जी की फिल्म दिल्लगी: सूक्ष्म मनोविज्ञान की गहरी पकड़

फिल्म दिल्लगी(1978) में सट्ल ह्यूमर (Subtle humour) की श्रेष्ठ बानगी देखने को मिलती है. फिल्मकार ने, मानव- स्वभाव के सूक्ष्म…

6 years ago
एक कहानी ये भी – मीनाकुमारी और धर्मेन्द्रएक कहानी ये भी – मीनाकुमारी और धर्मेन्द्र

एक कहानी ये भी – मीनाकुमारी और धर्मेन्द्र

बहुत से लोग आज इस बात को यक़ीन से कहते हैं कि धर्मेन्द्र ने अपना करियर बनाने के लिए मीनाकुमारी…

6 years ago
आई ज़ंजीर की झनकार ख़ुदा ख़ैर करेआई ज़ंजीर की झनकार ख़ुदा ख़ैर करे

आई ज़ंजीर की झनकार ख़ुदा ख़ैर करे

दुनिया में कामयाबी के लिए काबिलियत होना जितना जरुरी है उतना ही जरुरी किस्मत का होना भी है. कभी-कभी जिंदगी…

7 years ago