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कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का तुगलकी फरमानकुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का तुगलकी फरमान

कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का तुगलकी फरमान

इन दिनों उत्तराखंड में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति अपने ऊलजलूल बयानों के कारण चर्चा में हैं. हाल ही में उनके…

6 years ago
कलकत्ता कथा समारोह 1982 : जब भारतीय भाषाओं का नेतृत्व हिंदी करती थीकलकत्ता कथा समारोह 1982 : जब भारतीय भाषाओं का नेतृत्व हिंदी करती थी

कलकत्ता कथा समारोह 1982 : जब भारतीय भाषाओं का नेतृत्व हिंदी करती थी

भारतीय भाषाओं के शीर्षस्थ कथाकारों का समागम : ‘कलकत्ता कथा समारोह, 1982’ : जब भारतीय भाषाओं का नेतृत्व हिंदी करती…

6 years ago
डीएसबी नैनीताल यानी उत्तराखंड में आधुनिकता का प्रवेश द्वारडीएसबी नैनीताल यानी उत्तराखंड में आधुनिकता का प्रवेश द्वार

डीएसबी नैनीताल यानी उत्तराखंड में आधुनिकता का प्रवेश द्वार

आधुनिकता को अंग्रेजों के आगमन और उनकी भाषा के साथ आये ज्ञान-विज्ञान के साथ जोड़कर देखा जाता है. कुछ हद…

6 years ago
बाबर के साथ क्या रिश्ता था गुलशेर खां शानी और रहमतुल्ला काबाबर के साथ क्या रिश्ता था गुलशेर खां शानी और रहमतुल्ला का

बाबर के साथ क्या रिश्ता था गुलशेर खां शानी और रहमतुल्ला का

इन दिनों शानी बहुत याद आ रहे हैं. 1965 में जब अक्षर प्रकाशन से उनका उपन्यास ‘काला जल’ प्रकाशित हुआ…

6 years ago
दाड़िम के फूल – इस कहानी की एक कहानी हैदाड़िम के फूल – इस कहानी की एक कहानी है

दाड़िम के फूल – इस कहानी की एक कहानी है

मेरी कहानी ‘दाड़िम के फूल’ की भी एक मजेदार कहानी है. आनंद तब आए जब इससे पहले मेरे दोस्त बटरोही की कहानी ‘बुरांश…

6 years ago
ऐसा भी कहीं होता है?ऐसा भी कहीं होता है?

ऐसा भी कहीं होता है?

पिछली पोस्ट में मैंने भारत के कालजयी लेखक प्रेमचंद के परिवार के साथ रहने के कारण खुद को सौभाग्यशाली व्यक्तियों…

6 years ago
माँ शिवरानी देवी, प्रेमचंद और सास सुभद्रा कुमारी चौहानमाँ शिवरानी देवी, प्रेमचंद और सास सुभद्रा कुमारी चौहान

माँ शिवरानी देवी, प्रेमचंद और सास सुभद्रा कुमारी चौहान

इस पोस्ट को पिछली पोस्ट के क्रम में पढ़िए. पिछली पोस्ट का लिंक: पचास साल पहले इलाहाबाद में कथाकार अशोक…

6 years ago
पचास साल पहले इलाहाबाद में कथाकार अशोक कंडवाल के साथ: प्रेमचंद और उनके बेटे की स्मृतियांपचास साल पहले इलाहाबाद में कथाकार अशोक कंडवाल के साथ: प्रेमचंद और उनके बेटे की स्मृतियां

पचास साल पहले इलाहाबाद में कथाकार अशोक कंडवाल के साथ: प्रेमचंद और उनके बेटे की स्मृतियां

अपनी जिंदगी के किसी पुराने टुकड़े को एकदम जीवंत रूप में देखना कितना रोमांचकारी होता है, इसका अहसास मुझे कुछ…

6 years ago
डाना गैराड़ के कलबिष्ट देवता की शरण मेंडाना गैराड़ के कलबिष्ट देवता की शरण में

डाना गैराड़ के कलबिष्ट देवता की शरण में

चरवाहे लोकदेवता कलबिष्ट की शरण में (एक लोक देवता के अंकुरण की पृष्ठभूमि)-बटरोही इतने सालों के बाद क्या उसका यह…

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देवीधूरा का पाषाण युद्ध और पृथ्वी की प्रतीक बाराहीदेवी का मंदिरदेवीधूरा का पाषाण युद्ध और पृथ्वी की प्रतीक बाराहीदेवी का मंदिर

देवीधूरा का पाषाण युद्ध और पृथ्वी की प्रतीक बाराहीदेवी का मंदिर

काली कुमाऊँ योद्धाओं का क्षेत्र है, अतः यहाँ की सभी परंपराएँ शक्ति (ताकत) से जुड़ी हुई हैं. दानवों की भूमि…

6 years ago