समाज

सनगाड़ के ‘नौलिंग देवता’ से जुड़ी लोककथा

बहुत पुरानी बात है बागेश्वर के फरसाली गांव में एक नरभक्षी राक्षस उत्पन्न हो गया. राक्षस ने गांव उजाड़ दिया और वहां के लोगों को खा गया. अब जब गांव में एक ही आदमी बचा तो वह उसे खाने को दौड़ा. आदमी अपनी जान बचाने के खूब ईधर-उधर भागा पर अंत में राक्षस ने उसे पकड़ ही लिया.
(Story of Nauling Devta Sangadh)

अपनी पकड़ में लेने के बाद राक्षस ने उससे पूछा बता तुझे बचाने वाला कौन है इस गांव में. आदमी ने अपने सत्य का ध्यान किया और कहा है एक आदमी. राक्षस ने कहा बता कौन है? मैं पहले उसे ही खाता हूँ फिर तुझे खाऊंगा. आदमी ने राक्षस को सनगाड़ के नौलिंग देवता के मंदिर पहुँचा दिया.

किस्मत से जब दोनों वहां पहुंचे तो नौलिंग देवता की धुनि के पास एक आदमी बैठा था. राक्षस ने आदमी से पूछा तो उसने धुनि के पास बैठे आदमी की ओर ईशारा कर बताया कि वही उसे बचाने वाला आखिरी आदमी है. राक्षस सीधा धुनि के पास बैठे आदमी पर टूट पड़ा. धुनि के पास बैठे आदमी ने कांपते हुये राक्षस को खूब पीट दिया. उसने राक्षस को अठारह हाथ ऊपर आसमान उछाला और एक पत्थर पर पटक दिया.
(Story of Nauling Devta Sangadh)

राक्षस पस्त हो चुका था और कांपते हुये उसे पीटने वाले देव अवतरित आदमी को पसीना आ गया. आदमी ने अपना पसीना पोछकर जैसे ही नीचे गिराया उसके पसीने की हर एक बूंद से मनुष्य रूपी देवता अवतरित हो गये. सभी ने मिलकर राक्षस की हड्डी पसली तोड़ दी. उन्होंने उसे जमीन के भीतर एक गड्ढे में डाल दिया और उसके ऊपर लोहे की चादर और पत्थरों से राक्षस को दबा दिया.

सभी देवताओं ने मिलकर के अमृत बनाया और सारे गांव वालों पर अमृत छिड़कर सभी को जीवित किया. उसके बाद से फरसाली गांव की धरती पवित्र हो गयी और नौलिंग देवता पूरे क्षेत्र के आराध्य हो गये.   
(Story of Nauling Devta Sangadh)

-काफल ट्री फाउंडेशन

नौलिंग देवता और सनगड़िया मसाण की कहानी

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