पहाड़पानी. फोटो तनुज वर्मा
उत्तराखंड के सभी पहाड़ी जिलों में आज जमकर बर्फ़बारी हुई है. कुमाऊं और गढ़वाल दोनों के पहाड़ी जिलों में पिछले दो दशकों से इतनी बर्फ नहीं देखी गयी.
कुमाऊं के जिलों पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, चम्पावत सभी जगह काफ़ी बर्फ गिरी है.
स्थानीय लोग जमकर इसका आनन्द लेते नज़र आ रहे हैं. दिल्ली और आसपास से नैनीताल को सैलानियों ने आना भी शुरु कर दिया है.
सोसियल साईटस पर भी बर्फ से लदी पहाड़ियों की बहुत सी सुंदर तस्वीर आ रही हैं. वहीं उत्तराखंड से बाहर रह रहे प्रवासी उत्तराखंड की इन तस्वीरों को खूब साझा कर रहे हैं और अपने समय को याद भी कर रहे हैं.
पिछले एक दशक में पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा मुख्यालय में इस तरह की बर्फ देखने को नहीं मिली है. इसी तरह नैनीताल में भी यह इस सीजन की पहली बर्फबारी है.
नैनीताल और अल्मोड़ा में आये सैलानी इस बर्फबारी का खूब आनन्द ले रहे हैं.
पहाड़ को जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर जमकर बर्फ गिरी हुई है. इसके कारण कुछ स्थानों पर यातायात में बाधा की ख़बर भी आ रही है.
पहाड़ों के अधिकांश हिस्सों में बिजली न होने से थोड़ी बहुत परेशानी भी देखने को मिल रही है हालांकि विद्युत विभाग ने स्थिति के पूर्णतः नियंत्रण में होने की बात कही है.
वही मौसम विभाग की ओर से अगले चौबीस घंटे भी मौसम ख़राब रहने की चेतावनी पहले ही जारी कर दी गयी है.
कुमाऊं के अलग-अलग हिस्सों में बर्फ़बारी की कुछ तस्वीरें देखिये
पिथौरागढ़ मुख्यालय फोटो : मानसी जोशी
लोहाघाट सुईं गांव. फोटो : हेम चौबे
लोहाघाट सुईं गांव. फोटो : हेम चौबे
लोहाघाट सुईं गांव. फोटो : हेम चौबे
लोहाघाट सुईं गांव. फोटो : हेम चौबे
अल्मोड़ा. फोटो भूपेन्द्र सतवाल
अल्मोड़ा. फोटो भूपेन्द्र सतवाल
पहाड़पानी. फोटो तनुज वर्मा
लोहाघाट सुईं गांव. फोटो : हेम चौबे
पहाड़पानी. फोटो तनुज वर्मा
पहाड़पानी. फोटो तनुज वर्मा
अल्मोड़ा. फोटो भूपेन्द्र सतवाल
अल्मोड़ा. फोटो भूपेन्द्र सतवाल
पिथौरागढ़ मुख्यालय फोटो : मानसी जोशी
काफल ट्री डेस्क
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…
संसार मिथ्या और जीवन भ्रम है, मनुष्य का मानना है वह जीवों में श्रेष्ठ व बुद्धिमान…
पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र…
उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…
भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…
उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…