प्रिय अभिषेक

ठेसबुक में लाठी, कट्टे, तमंचे के प्रवेश की व्यवस्था हेतु मारक जोकर बर्ग के नाम प्रार्थना पत्र

सेवा में,
         श्रीमान मारक जोकर बर्ग जी
         मुख्य अभियंता
         ठेसबुक

विषय – ठेसबुक में सुधार कर उसमें घुसने की व्यवस्था बाबत

महोदय,  विषय में निवेदन है कि हम सभी प्रार्थीगण चटोराबाद की विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. वैसे तो ये विचारधाराएं अनेक हैं, पर सुविधा से खेलने के लिए हमने इन्हें दाईं और बाईं, दो पालीयों में बाँट रखा है. और इसी ‘सुविधा’ की खातिर हमारे खिलाड़ी कभी-कभी इस पाली से उस पाली में आते-जाते रहते हैं.

श्रीमान जी समस्या ये है कि जब भी कभी आपकी ठेसबुक पर कोई हमारे विचार से असहमत होता है, या हम उसके विचार से राजी नहीं होते, तो हम एक दुसरे को ठीक से कन्भेन्स नहीं कर पाते. निकट या एक शहर में रहने वालों के सम्बन्ध में ये समस्या नहीं है.

जैसे पिछली बार मुन्ना बजरंगी, जो हमारे पड़ोस में रहता है, एक पोस्ट से सहमत नहीं था . हमने उसके घर जा कर अपनी कोहनी और घुटनों से उसे कंभेन्स कर लिया था. श्रीमान इसी तरह अल्ताफ अली, जो पिछली गली में रहता है, काफी दिनों से हमारी पोस्ट पे उल्टा सीधा लिखता था. एक बार हमने उसे बाजार में घेर लिया. श्रीमान हमने उसकी पसलीयों में इतने ठूंसे दिए कि साले को हमारी पोस्ट लाइक (वो दिल वाली)करनी ही पड़ी. कान पकड़ के ले आये थे ससुरे को दाएं से बाएं.

श्रीमान दूसरी कॉलोनी का एक प्रोफेसर भी बहुत ज्ञान झाड़ता था. किताबों और लेखकों के नाम ले-ले कर धमकी देता था. हमने उसके घर पर पत्थर,गुम्मे, रोड़े फेंक-फेंक कर, ऐसा सिलेंडर करवाया उस अंग्रेज की औलाद को कि एक बार जो लॉग ऑउटा, तो लौटा ही नहीं.

 श्रीमान जी जो लोग शहर में उधर रहते हैं,  जिधर अपना रोल पाटा नहीं चलता, हम खुन्नसपूर्वक उनकी सीफल, बैटरी चुरा कर मन को शांत कर लेते हैं. पर मूल समस्या  दुसरे शहरों, मुल्कों में रहने वाले लोगों से आती है.

जब कभी हम इनसे या ये हमसे असहमत होते हैं तो भौगोलिक दूरी के कारण हम इन लोगों को तार्किक रूप से कन्भेन्स नहीं कर पाते हैं.

 श्रीमान जी कई बार हमारा भी मन होता है कि ससुरे की नाक तोड़ दें, मुँह दौंच दे . पर कप्यूटर में घुसने की व्यस्था ना होने से हम कसमसा के रह जाते हैं. ऐसा लगता है कि हमने अपने प्रभु राम, अल्लाह,मार्क्स बाबा, भीम अंकल से कोई गद्दारी कर दी हो. हालाँकि गाली-गलौज,  तू-तड़ाक तो जम के हो जाती है लेकिन जो आँखों में खून उतर आता है और बाजु फड़कते है उसका क्या? कई बार तो बीपी और अटैक का खतरा भी हो जाता है.

अतः श्रीमान से विनती है कि आप अपने ठेसबुक में हमारे मय लाठी, कट्टे, तमंचे के प्रवेश की व्यस्था करने की कृपा करें. हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि एक बार आप हमें कैसे भी अंदर घुसेड़ दें, तो हम एक फाइनल विचार लेकर ही बाहर निकलेंगे.

                       निवेदक - समस्त कार्यकर्त्तागण
                      भारतीय चाट पार्टी(भा च पा)
                      खाऊग्रेस
                      बहुजन चाट पार्टी (ब च पा)
                      चाट वादी पार्टी (च पा)
                      वाम चाट पार्टी ( गोलगप्पावादी)
                      वाम चाट पार्टी ( दही बड़ा-मटर)
                      मार्क्सवादी मीठा पार्टी(मालपुआ)
                      तैमूर और उसके मम्मी पापा.

प्रिय अभिषेक
मूलतः ग्वालियर से वास्ता रखने वाले प्रिय अभिषेक सोशल मीडिया पर अपने चुटीले लेखों और सुन्दर भाषा के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में भोपाल में कार्यरत हैं.

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Girish Lohani

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