इन दिनों यूट्यूब पर नरेंद्र सिंह नेगी का गीत ‘ठंडो रे ठंडो पहाड़ों को पानी ठंडो’ खूब पंसद किया जा रहा है. अलबत्ता गीत नरेंद्र सिंह नेगी का है पर लोगों द्वारा खूब पसंद किये जा रह इस गीत में आवाज अमेरीकी शहर बोस्टन में रहने वाले 8 साल के एक बच्चे की है. 8 साल के रायन गिरी की आवाज में पहले यह गीत सुनिये:
(Ryan Giri)
रायन के पिता भुवन गिरी पिथौरागढ़ की वादियों में पले-बड़े. जैसा की आम पहाड़ियों के साथ होता है अच्छे जीवन स्तर की ख़ोज में भुवन का परिवार पहले खटीमा और अब अमेरिका के बोस्टन शहर में रहता है. बोस्टन शहर में ही भुवन गिरी के बड़े बेटे रायन का जन्म हुआ.
अमेरिका के ऐसे माहौल में जहां की हिन्दी अमेरीकी लहजे की मारी होती पहाड़ी बोली की कल्पना किसी सपने से कम नहीं हैं. पर अगर आपके दिल में पहाड़ बसता है तो उसके संस्कारों और बोली को सीखने के लिये सात समुद्रों की दूरी भी कोई मायने नहीं रखती.
(Ryan Giri)
रायन गिरी द्वारा गाये गीतों को यूट्यूब में राज्य भर के लोगों द्वारा सराहा जा रहा है. अमर उजाला से बातचीत के दौरान रायन के पिता भुवन ने बताया कि वह पेशे से आईटी सेक्टर में नौकरी करते हैं और नौकरी के चलते ही बोस्टन शहर में रह रहे हैं. बचपन से ही पहाड़ी परिवेश में पले बड़े होने के कारण यहां की संस्कृति उनके दिल के बेहद करीब रही है.
भुवन बताते हैं कि वह नहीं चाहते की मेरी नौकरी के चलते हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से उनकी अगली पीढ़ी वंचित रह जाये. इसलिए उन्होंने अपने बेटे को अपने पहाड़ की संस्कृति से रूबरू कराया जिसका परिणाम यह रहा कि कभी हिन्दी बोलने में कठिनाई महसूस करने वाला रायन आज अपनी मीठी आवाज में लोकगीत गाकर लोगों का चहेता बन रहा है.
(Ryan Giri)
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…
संसार मिथ्या और जीवन भ्रम है, मनुष्य का मानना है वह जीवों में श्रेष्ठ व बुद्धिमान…
पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र…
उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…
भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…
उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…