Featured

डाक टिकट भी जारी हो चुका है हिमालय के इस वफादार-बहादुर कुत्ते पर

हिमालय के पहाड़ी इलाकों ख़ास तौर पर उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल में पाई जाने वाली कुत्तों की सबसे विख्यात नस्ल है हिमालयन शीपडॉग. आम बोलचाल की भाषा में इसे भोटिया कुकुर कहा जाता है. आधिकारिक रूप से इस नस्ल के इतिहास के बारे में बहुत निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रजाति नेपाली और भारतीय मूल की है. इसके आलावा ये कुत्ते विख्यात तिब्बती नस्ल तिबेतन मास्टिफ़ की ही उप-नस्ल माने जाते हैं. इन्हें लम्बे बालों वाले किन्नौर शीपडॉग का संबंधी भी बताया जाता है.

बहुत लम्बे समय से हिमालयन शीपडॉग पहाड़ी चरवाहों के सबसे प्रिय और विश्वस्त साथी रहे हैं. हिमालयन शीपडॉग बहुत मज़बूत कदकाठी का होता है. इसका आकार सामान्य से कुत्तों से कहीं अधिक बड़ा होता है. चौड़े कंधे, बड़े आकार का सिर और मजबूत चौड़े पंजे इन झबरीले कुत्तों की खासियत है.

हिमालयन शीपडॉग रात के समय अधिक क्रियाशील रहता है और इसी कारण से यह पर्वतीय ऊंचाइयों पर अपने रेवड़ के साथ समय बिताने वाले चरवाहों के सबसे प्रिय पहरेदार बना हुआ है. दिन के समय अमूमन अलसाया रहने वाला यह कुत्ता आपको पहली निगाह में बहुत ही भोला और पालतू लगेगा लेकिन रात आने पर यह इतना खूंखार हो जाता है कि उसकी बगल से होकर गुज़र सकना तक असंभव होता है.

हिमालयन शीपडॉग की आक्रामकता और उसकी चुस्ती-फुर्ती के कारण इसे कई जगहों पर शिकारी कुत्ते की तरह भी पाला जाता है. पिथौरागढ़ जिले की दारमा-व्यांस घाटियों में अनेक पीढ़ियों से चरवाहे का काम कर रहे कुंदन सिंह भण्डारी बतलाते हैं कि दो या तीन कुत्ते मिलकर न केवल हज़ार-आठ सौ भेड़-बकरियों की चौकस पहरेदारी कर सकते हैं, विषम और विपरीत परिस्थिति आ जाने पर ये इतने खूंखार हो जाते हैं कि पहाड़ी बाघ का शिकार तक कर सकते हैं.

अपने स्वामी और उसके रेवड़ के प्रति वफादारी इस नस्ल की एक और विशिष्टता है. उनके इस गुण की दिलचस्प कहानियां सुननी हों तो आपको उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ट्रेकिंग पर जाना होगा जहां गर्मियां बिताने वाले घुमंतू चरवाहे आपको अपने शिविर गाड़े हुए मिल जाएंगे. कुंदन सिंह भण्डारी कहते हैं कि उनके परिवार में ये कुत्ते कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और घर के सदस्यों जैसे होते हैं.

चूंकि ये हिमालयन शीपडॉग रात के समय अत्यधिक चपल हो जाते हैं, लम्बे समय तक किसी घर के भीतर पालना उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता. यह मूलतः आउटडोर नस्ल है जिसे बहुत अधिक शारीरिक अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है. पालतू बनाने के लिए उन्हें लम्बे समय तक प्रशिक्षण दिया जाना होता है. उनकी अड़ियल प्रवृत्ति के चलते उन्हें प्रशिक्षित कर सकना कई बार बहुत मुश्किल भी हो सकता है. इसलिए उन्हें प्रशिक्षण देने का काम बहुत छोटी उम्र से किया जाना चाहिए.

हिमालयन शीपडॉग की औसत आयु दस वर्ष होती है.

9 जनवरी 2005 को भारतीय डाक विभाग ने भारतीय मूल के कुत्तों की चार नस्लों पर विशेष डाक टिकट जारी किये थे. तीस-तीस लाख डाक टिकटों वाली इस सीरीज में पहला नंबर इसी नस्ल का था. जिन अन्य तीन नस्लों को इस में जगह मिली वे हैं – रामपुर हाउंड, मुधोल हाउंड और राजपालयम.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

Олимп казино официальный сайт в Казахстане – Olimp Casino

Олимп казино официальный сайт в Казахстане - Olimp Casino ▶️ ИГРАТЬ Содержимое Преимущества игры в…

2 days ago

Guide du bonus 1xbet APK – conditions de mise, bonus de bienvenue et retraits

Qu’est‑ce que le 1xbet APK ?Télécharger et installer le 1xbet APK en toute sécuritéCréation de…

2 days ago

Betify Casino en Ligne | Jouez sur Betify avec 1000 €

Betify Casino en Ligne | Jouez sur Betify avec 1000 € ▶️ JOUER Содержимое Betify…

2 days ago

Polskie kasyna online z darmowymi spinami dla nowych graczy

Polskie kasyna online z darmowymi spinami dla nowych graczy ▶️ GRAĆ Содержимое Jak wybrać najlepsze…

2 days ago

Slovenské online kasína – zoznam odporúčaných kasín pre hráčov

Slovenské online kasína - zoznam odporúčaných kasín pre hráčov ▶️ HRAť Содержимое Odporúčané online kasína…

2 days ago

Zonder Cruks Online Casino – Veiligheid en beveiliging van spelers

Zonder Cruks Online Casino - Veiligheid en beveiliging van spelers ▶️ SPELEN Содержимое Veiligheid van…

2 days ago