Featured

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले माह केदारनाथ दौरे पर संशय बरक़रार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले माह केदारनाथ आ सकते हैं. केदारनाथ का पुनर्निर्माण आखिर चरण में है. माना जा रहा है कि आठ अक्तूबर को  केदारधाम में भगवान केदारनाथ के दर्शन करेंगे. इस दौरान नई केदारपुरी का भी लोकार्पण कर सकते हैं. कपाट खुलने के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केदारनाथ धाम नहीं पहुंच पाये थे. हालांकि उनके बाबा के धाम में आने की औपचारिक पुष्टि किसी भी स्तर पर नहीं की गयी है.

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री केदारनाथ आना चाहते है. परंतु निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार से वह नाराज हो गये और अपना कार्यक्रम अभी पूर्ण रूप से तय नहीं हो सका है. गौरतलब है कि केदारनाथ में निर्माण कार्यों का हाल-बेहाल है. बाबा के मंदिर तक जाने के लिए जो रास्ता बनाया गया है उस पर डाला गया सीमेंट उखड़ने लगा है और सीमेंट के बलाक्स बिखरने लगे हैं.

प्रधानमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए वीआईपी हेलीपेड मंदिर के रास्ते तक स्थानीय पत्थर बिछाने उद्धव कुंड, शंकराचार्य समाधि व भैरव मंदिर रास्ते के कार्य को जल्द पूर्ण करने के भी निर्देश दिए गए है.

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के अधिकारियों को इसके संकेत दिए.  साथ ही पीएम के दौरे से पूर्व सारी तैयारी पूरी करने को भी निर्देश  दिए.

केदारनाथ में जिस स्थान को दिव्य दर्शन स्थल के तौर पर स्थापित किया जा रहा है, उसका काम पूरा हो चुका है. करीब चार से पांच फीट चौड़ा मंदिर मार्ग की चौड़ाई अब 70 फीट हो चुकी है प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारपुरी में हो रहे नवनिर्माण कार्य पर्वतीय लोक संस्कृति के भी दर्शन कराएंगे.

खासकर, केदारनाथ मंदिर के ठीक सामने पैदल मार्ग ठेठ पहाड़ी अंदाज में पटालों से तैयार हो रहा है. 250 मीटर लंबे और 50 मीटर चौड़े इस मार्ग पर कंक्रीट या सीमेंट की टाइल्स नहीं, बल्कि 40 हजार पहाड़ी पटाल बिछाई जाएंगी. केदारपुरी में गत 20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन पांच योजनाओं की नींव रखी थी, उनमें केदारनाथ मंदिर से लेकर मंदाकिनी व सरस्वती नदी के संगम तक पैदल मार्ग का निर्माण भी शामिल है.

केदारनाथ, बेस कैंप केदारनाथ, लिंचोली, भीमबली और जंगलचट्टी में तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने के लिए नए स्थान बनाए गए. केदारनाथ जाने वाले रास्ते के एक खूबसूरत पड़ाव सोनप्रयाग ने भी नई शक्ल ले ली है. जहां आपदा के बाद 2014 में सिर्फ 40 हजार तीर्थयात्री केदारनाथ आए, वहीं इस साल अब तक यात्रियों की संख्या के मामले में पिछले सभी रिकॉर्ड टूट चुके हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे

पिछली कड़ी  : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट…

5 days ago

एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा

पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले…

5 days ago

तिब्बती समाज की बहुपतित्व परंपरा: एक ऐतिहासिक और सामाजिक विवेचन

तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक…

5 days ago

इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक

हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में जब कोई आगंतुक किसी…

5 days ago

नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !

नाम को तोड़-मरोड़ कर बोलना प्रत्येक लोकसंस्कृति की खूबी रही है. राम या रमेश को रमुवा, हरीश…

5 days ago

खेती की जमीन पर निर्माण की अनुमति : क्या होंगे परिणाम?

उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि पर निर्माण व भूमि उपयोग संबंधित पूर्ववर्ती नीति में फेरबदल…

6 days ago