Featured

राजा का बेटा राजा और विधायक का भतीजा जिला पंचायत सदस्य बनेगा!

आप सोच रहे होंगे कि इस हेडिंग का मतलब क्या है, तो हम आपको पूरी खबर बताए, इससे पहले फिल्म सुपर 30 की बात कर लेते हैं, जो बिहार के फेमस शख्स आनंद कुमार पर बनी है. आनंद कुमार गरीब बच्चों को फ्री में आईटी की कोचिंग करवाते हैं और हर बरस उनके पढ़ाए कई बच्चे देश के प्रतिष्ठित आईटी कॉलेज में दाखिला लेते हैं. इस फिल्म में एक डॉयलाग में आनंद कुमार का किरदार निभा रहे ऋतिक रोशन कहते हैं कि अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा, राजा वो बनेगा, जो हकदार होगा. लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में परिवारवाद कुछ तरह जड़े जमा रहा है, उसका एक उदाहरण पंचायत चुनाव हैं.

कल बीजेपी ने पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के लिए बीजेपी समर्थित दावेदारों का ऐलान किया. इस लिस्ट को देखने पर नजर एक दावेदार पर अटक जाती है.

अल्मोड़ा के माननीय विधायक रघुनाथ सिंह चौहान के भतीजे को भी जिला पंचायत सदस्य का टिकट दिया गया है. हैरानी की बात जो थी वह यह कि उन्हें टिकट कहां से मिला. विधायक जी के भतीजे को टिकट उस क्षेत्र से दिया गया है, जहां से वो संबंधित नहीं है.

चलिए आपको नाम भी बता देते हैं. विधायक जी जो कि उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर भी है, उनके भतीजे गोपाल सिंह चौहान कुमौली से जिला पंचायत सदस्य के उम्मीदवार हैं और उन्हें बीजेपी ने दावेदार के तौर पर अपना समर्थन दिया है.

इस पर कई सवाल उठ रहे हैं. उन्हें उस क्षेत्र से जहां से वो संबंध रखते हैं, टिकट इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वो वहां उनके जीतने की संभावना कम थी. सूत्रों का कहना है कि इसलिए उनकी पैराशूट लैडिंग कराई गई. लोकल उनके टिकट मिलने पर सवाल उठा रहे हैं.

गौरतलब है कि उत्तराखंड के 13 जिलों में तीन चरणों में 6 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक पंचायत चुनाव होंगे. राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, चुनावों के परिणाम 21 अक्टूबर को घोषित होंगे. राज्य के निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट के मुताबिक, प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया 20 सितंबर को नामांकन पत्रों के भरने की शुरुआत से होगी.

मारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

विविध विषयों पर लिखने वाले हेमराज सिंह चौहान पत्रकार हैं और अल्मोड़ा में रहते हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व

बचपन में हमें होली-दिवाली और राखी के अलावा मकर संक्रांति, घी त्यार और फूलदेई जैसे उत्सवों…

3 days ago

पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता

इस बार करीब 9 साल बाद पिथौरागढ़ जाकर एक बात साफ दिखी कि यहां कुछ…

1 week ago

अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें

आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड…

2 weeks ago

अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक

उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन के अवसर नहीं रहे हैं. वे लोकजीवन की…

2 weeks ago

सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन

पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज

1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि…

2 weeks ago