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ओलम्पिक के एक ही मैच में 5 गोल दागने वाला उत्तराखंड का हॉकी खिलाड़ी

भातीय हॉकी के लिये आज दिन बेहद ख़ास है. जर्मनी को 5-4 से हराकर 41 साल आज भारतीय टीम ने ओलम्पिक में पदक जीता. जानिये उत्‍तराखंड के एक हॉकी प्‍लेयर के बारे में जिसकी बदौलत 1956 में भारत ने ओलंपिक में स्‍वर्ण पदक जीता था.
(Olympian Hockey Player of Uttarakhand)

1956 का ओलम्पिक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुआ. भारतीय टीम की कमान बलबीर सिंह सीनियर के हाथों में थी. ग्रुप मैच के दौरान 28 नवंबर 1956 को भारत का मुकाबला अमेरिका से था. अमेरिका के खिलाफ खेले गये इस मैच में कप्तान बलबीर सिंह घायल हो गये तब मैदान में जलवा बिखरने की बारी थी 27 वर्षीय हरदयाल सिंह की. भारत यह मुकाबला 16-0 जीता जिसमें 5 गोल अकेले हरदयाल सिंह के थे.     

1956 के इस ओलम्पिक में फाइनल में भारत की भिड़ंत पाकिस्तान के साथ थी. भारत ने पाकिस्तान को  1-0 से हरा कर ओलंपिक में अपनी छठी जीत दर्ज की. हरदयाल सिंह ने अपने ओलम्पिक करियर में 19 गोल मारे थे.
(Olympian Hockey Player of Uttarakhand)

देहरादून में जन्मे हरदयाल सिंह हॉकी खेलने से पहले कुछ समय तक भारतीय सर्वेक्षण विभाग देहरादून में काम करते थे. अपने एक जानने वाले के कहने पर हरदयाल सिंह भारतीय सेना की सिख रेजीमेंट में शामिल हो गए. 1949 में हरदयाल सिंह सिख रेजीमेंट में स्पोर्ट्स कोटे के तहत भर्ती गो गये. बाद में उन्हें सिख रेजीमेंट हॉकी टीम में कोच कम मैनेजर का पद भी दिया गया. हरदयाल सिंह 1985 में एशिया कप खेलने गई भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच रहे थे. 1969 में भारतीय सेना से सूबेदार के पद से रिटायर हुए थे.

रिटायरमेंट लेने के बाद हरदयाल सिंह 1983 से 1987 तक भारतीय हॉकी टीम के कोच रहे. 2004 में हॉकी में विशेष योगदान के लिए उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया. देहरादून में हरदयाल सिंह का निधन 17 अगस्त 2018 को 90 साल की उम्र में हुआ.
(Olympian Hockey Player of Uttarakhand)

ओलम्पिक में स्वर्ण पदक दिलाने वाले इस खिलाड़ी का जीवन अंत में मुफलिसी में बीता. राजधानी में रहने के बावजूद उत्तराखंड सरकार ने उनकी कभी कोई सुध नहीं ली. 2015 पंजाब सरकार ने उनकी दो लाख रूपये की मदद की जिससे उन्होंने अपने अस्पताल के बिलों का भुगतान किया.

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काफल ट्री डेस्क

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