रानीखेत के कुनेलाखेत से लगे पखुड़ा गांव में नंदा अष्टमी का मेला प्रारंभ हो गया है. पिछले 75 बरसों से भी अधिक समय से लगने वाले इस मेले की शुरुवात गांव में निवास करने वाले नर देव सुयाल के घर से होती है.
(Nandashtmi in Ranikhet Village)
हर साल नंदा अष्टमी के दिन मां नंदा का डोला उठाया जाता है और उसे पखुड़ा गांव के पोखर तक ढोल-दम्मू के साथ ले जाया जाता है. मां काली के जीवंत रूप में विराजमान मां नंदा के बारे में गांव में अनेक कहानियां है. जिस में से एक कहानी यह है कि गांव के एक व्यक्ति ने भक्तों द्वारा मां काली को चढ़ाई गई घंटियों को चुरा ले गया.
(Nandashtmi in Ranikhet Village)
मां काली के प्राकोप के कारण व्यक्ति अंधा हो गया. गांव में जब यह बात पता चली तो व्यक्ति की मां द्वारा सारी घंटियां वापस की गई. जिसके बाद उस व्यक्ति के आंखों की रोशनी वापस लौट आई. मां काली के जीवंत रूप होने की ऐसी अनेक घटनाएं हैं.
नंदा अष्टमी के दिन जो भी सच्चे मन से मां के दरबार में जाता है मां काली उसे खाली हाथ नहीं रहने देती है. कुछ तस्वीरें –
(Nandashtmi in Ranikhet Village)
रश्मि सुयाल
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
लेखे के नये लाल बैग से निकला निर्मल बजट उत्साह संवर्धन नीति का पिटारा लाया…
कोटद्वार में बाबा की दुकान का नाम बदले जाने और बजरंग दल से भिड़ने वाले…
पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा भगवान लकुलीश को भारतीय शैव परंपरा के विकास में एक अत्यंत…
नारायण आश्रम उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में धारचूला से ऊपर, ऊँचे पहाड़ों और गहरी घाटियों…
हिमालय की ऊँची पहाड़ियों के बीच एक छोटा-सा गाँव था. पत्थर के घर, देवदार के…
कहा जाता है कि एक बार हिमालय में एक वैद्य गुरु अपने शिष्यों की शिक्षा…