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विश्वकप के इस भारतीय नायक को वह श्रेय कभी नहीं मिला

भारतीय टीम के 1983 विश्वकप अभियान को अगर फाइनल तक ले जाने का श्रेय कपिल देव को जाता है तो उसे सेमीफाइनल और फाइनल में जिताने वाले खिलाड़ी का नाम भी उतनी ही इज्जत के साथ लिया जाना चाहिए. (Mohinder Amarnath Great Cricketer)

मोहिन्दर अमरनाथ उर्फ़ जिमी इंग्लैण्ड के खिलाफ हुए लॉर्ड्स में हुए सेमीफाइनलस में पहले अपने 12 ओवरों में 2 विकेट लिए. ये विकेट इंग्लैण्ड के सबसे खतरनाक बैट्समैनों डेविड गावर और माइक गैटिंग के थे. उसके बाद बैटिंग करते हुए वे 46 पर रन आउट हुए. उन्हें इस हरफनमौला प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ़ द मैच का इनाम दिया गया.

किंग रिचर्ड्स और बिग बर्ड का था 1979 का विश्वकप

फाइनल में भारत का सामना पिछली दो बार की चैम्प्यं रही वेस्ट इंडीज़ की टीम से था. लॉयड ने टॉस जीता और भारत से पहले खेलने को खा. रोबर्ट्स, गार्नर, मार्शल और होल्डिंग की पेस चौकड़ी ने भारत को कुल 183 पर आल आउट कर दिया. श्रीकांत ने 38 और मोहिंदर अमरनाथ ने 26 की पारियां खेलीं. वेस्ट इंडीज के साथ खेली गयी पिछली दो टेस्ट श्रृंखलाओं में हल शॉट खेलने में माहिर मोहिंदर ने जिस तरह तेज गेंदबाजी का सामना किया था उसे देख कर कप्तान क्लाइव लॉयड ने कहा था कि उन्होंने तेज गेंदबाजी को खेलने वाला मोहिंदर जैसा दूसरा खिलाड़ी पूरी दुनिया में नहीं देखा. यह अलग बात है कि पिछली सीरीज में मैल्कम मार्शल के एक बाउंसर से उनके जबड़े पर भयंकर चोट लगी थी जिसके बाद उन्हें 25 टाँके लगाने पड़े थे. विश्वकप में खेलते समय मोहिंदर को इन टांकों को छिपाने के लिए मूंछें उगानी पड़ी थीं. (Mohinder Amarnath Great Cricketer)

वेस्ट इंडीज ने खेलना शुरू किया. बलविंदर सिंह संधू की बनाना इनस्विंगर पर गॉर्डन ग्रीनिज का क्लीन बोल्ड होना और बेहतरीन बल्लेबाली कर रहे विव रिचर्ड्स के कपिल के शानदार कैच की वजह से आउट होना जैसे किसी सपने की तरह घटा और देखते देखते वेस्ती इंडीज का स्कोर 76 पर 6 हो गया. यहाँ से विकेटकीपर जेफ़ डूजोन और मैल्कम मार्शल ने स्थिति सम्हाली और स्कोर को सवा सौ के आसपास पहुंचा दिया. कपिल देव ने गेंद मोहिंदर को थमाई और दोनों विकेट लेकर मोहिंदर ने स्कोर 124 पर 8 पहुंचा दिया. उसके बाद वेस्ट इंडीज का आख़िरी विकेट माइकेल होल्डिंग के रूप में गिरा. उन्हें भी मोहिंदर ने आउट किया और सभी उम्मीदों को झुठलाते हुए भारत विश्व चैम्पियन बना. उनका गेंदबाजी का विश्लेषण था – 7-0-12-3. मोहिंदर अमरनाथ को फाइनल में भी मैन ऑफ़ द मैच का खिताब मिला.

कपिल देव के 175 नॉट आउट की एक स्मृति

जिमी अमरनाथ को उस साल विस्डन ने अपने पांच सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों में चुना.

मैदान पर विनम्रता की मूर्ति नज़र आने वाले और अपने शानदार प्रदर्शन से भारत की शान बार-बार बढाने वाले इस खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पक्षपात का बार बार शिकार होना पड़ता था. अपने उन्नीस साल के करियर में उन्हें करीब एक दर्ज़न बार टीम से निकाला गया लेकिन वे बार बार सपने प्रदर्शन के बूते पर टीम में वापसी करते रहे. वे भारतीय क्रिकेट के फ्रैंक सिनात्रा थे. उनके पीछे इस पक्षपात का एक कारण उनका लाला अमरनाथ जैसे बेबाक खिलाड़ी का बेटा होना भी था. जो भी हो निर्विवाद सत्य यही है कि जिमी अमरनाथ के बिना भारतीय टीम का विश्वकप जीतना नितांत असंभव था.

क्रिकेट इतिहास का सबसे घटिया फैसला और 45 आल आउट

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