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उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल मोहन सिंह की ईमानदारी

भारत में सबसे ज्यादा और सबसे भद्दी गाली खाने वालों में पुलिस विभाग का स्थान नंबर एक पर है. भारत में पुलिस की वर्दी का इतना बुरा हाल है कि अगर कोई पुलिस वाला दाएं मुड़ने की सही सलाह देगा तो आदमी आँख चुराकर बाएं मुड़ जायेगा.

हर सरकारी महकमे की तरह पुलिस विभाग में भी बुरे लोग हैं. इसमें पुलिस विभाग की नहीं इस विभाग के सरकारी होने की गलती है. सरकार न जाने कौन सा टीका सरकारी दफ्तरों में लगवाती है कि मेहनती आदमी भी काम से जी चुराने लगता है. इस टीके का असर सभी सरकारी कर्माचारियों पर नहीं होता है पर जिस पर होता है जबर होता है.

टीके से ग्रसित किसी सरकारी कर्मचारी के साथ आप तीन दिन रहिये चौथे दिन से आपका भी काम में दिल नहीं लगेगा. अगर भारत के सभी सरकारी विभागों को देखेंगे तो इस बात में दोराय नहीं की सबसे ज्यादा मेहनकश विभाग सबसे ज्यादा गाली खाने वाला पुलिस विभाग ही है.

अब अगर आपसे कोई कहे कि एक पुलिस कांस्टेबल ने अपने जिलाधिकारी को कानून तोड़ने पर जेल भेजने की धमकी दे दी तो क्या आप यकीन करेंगे? रुद्रप्रयाग में तैनात उत्तराखंड पुलिस के एक कांस्टेबल ने ऐसा सच में किया हैं. नाम है मोहन सिंह.

कांस्टेबल मोहन सिंह

बात बीते रविवार की है जब जिलाधिकारी मंगलेश घिल्डियाल केदारनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा प्रबन्धों की जांच के लिये भेष बदलकर निकले थे. जिलधिकारी ने रात के बारह बजे सोनप्रयाग में कांस्टेबल मोहन सिंह से गौरीकुंड जाने देने का आग्रह किया जिसकी अनुमति कांस्टेबल मोहन सिंह ने नहीं दी.

जिलाधिकारी ने कांस्टेबल को दो सौ रुपये से दो हजार तक का प्रलोभन दिया लेकिन कांस्टेबल ने उल्टा जिलाधिकारी को हड़काते हुए कहा कि ज्यादा आग्रह किया तो सीधा जेल भेज दिया जायेगा.

कांस्टेबल की ईमानदारी से प्रभावित होकर प्रशासन ने कांस्टेबल को पांच हज़ार रुपये इनाम और एक प्रशस्तिपत्र देने की बात कही है.

-काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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