सुन्दर चन्द ठाकुर

खुद को पहचानो, अकूत संभावनाओं के बीज हो तुम

अपने ही जीवन में हम कई ऐसे लोगों को जानते हैं, जिन्होंने अपनी जीवन-यात्रा से हमें हैरान किया है. वे हमारे साथ हमारे ही स्कूलों में थे, हमारी ही कक्षा में पढ़ते थे, हमारे साथ ही खेलते थे, हमारे साथ ही वे कॉलेज गए, लेकिन आज वे हमसे कहीं आगे हैं. हमारे भीतर क्या संभावनाएं छिपी हुई हैं, वे किसी को दिखाई नहीं देतीं. लेकिन एक दिन जब उन संभावनाओं का बीज फूटकर पेड़ में तब्दील हो जाता है और पेड़ आकाश की ऊंचाई छूता है, तब सबको वह दिखाई देता है. इसीलिए मैं जब भी बच्चों को देखता हूं, तो वे मुझे असीमित संभावनाओं के बीज के रूप में दिखाई देते हैं. बच्चे ही क्यों, मुझे तो हर व्यक्ति में असीमित संभावनाएं दिखाई देती हैं. यह सिर्फ व्यक्ति पर निर्भर है कि वह इन संभावनाओं को पहचान कर और फिर सींचकर उन्हें धरती के सीने में उठा हुआ एक विशाल पेड़ बना दे. Mind Fit 12 Column by Sundar Chand Thakur

मैं जब सात साल का रहा हूंगा, दिल्ली में मदनगीर के एक छोटे से सरकारी घर में रहता था. पिताजी फौज में सिपाही थे. उन दिनों मैं मनोरंजन के लिए साइकिल के पुराने टायर चलाया करता था, लेकिन साथ ही कहानी की किताबें भी बहुत पढ़ता था. नंदन, चंपक, चंदामामा, लोटपोट और भी जाने क्या-क्या. उस वक्त जब लोग मुझे फटे कपड़ों में गंदे बाल और बहती नाक के साथ टायर के पीछे भागते देखते होंगे, तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह बालक बड़ा होकर सेना में अफसर भी बनेगा और कलम का सिपाही भी. हालांकि अब साइकिल के पुराने टायर चलाते हुए बच्चे बहुत कम दिखाई देते हैं, लेकिन जब कभी मुझे कोई दिख जाता है, मैं उसे बहुत सम्मान से देखता हूं, क्योंकि मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता कि उसमें क्या-क्या बनने की संभावनाएं मुझे दिखाई देती हैं. Mind Fit 12 Column by Sundar Chand Thakur

हर व्यक्ति में हर पल हजारों बीज दबे हुए होते हैं, फूटकर खिलने का इंतजार करते. यह हम पर है कि हम अपने ही भीतर छिपी संभावनाओं को पहचान पाते हैं या नहीं. कुछ लोग वक्त पर पहचान लेते हैं, परंतु कुछ पहचानने में बहुत देर कर देते हैं. इस बारे में एक बहुत प्यारी कथा है.

एक बार एक किसान को बाज के घोसले में कुछ समय पहले ही पैदा हुआ बच्चा दिखा. उसे जब उसकी मां नहीं दिखी, तो वह उसे अपने घर ले आया. उस किसान ने कई मुर्गियां पाली हुई थीं. एक मुर्गी ने कुछ समय पहले ही छह अंडे सेंके थे, जिनसे छह चूजे निकले. बाज के बच्चे और चूजे करीब-करीब साथ ही दुनिया में आए थे. बाज का बच्चा भी मुर्गी के चूजों के साथ रहने लगा. वह उन चूजों के साथ मुर्गी के पीछे-पीछे ही जाता, चूजों की तरह दाने और कीड़े चुगता और चूजों के साथ ही सोता. चूजों के साथ रहते हुए वह खुद को भी चूजा समझने लगा. मुर्गी उसे अपने बच्चे की तरह देखती थी. किसान भी उससे दूसरे चूजों जैसा ही बर्ताव करता था. इसी तरह दिन गुजरने लगे. बाज का बच्चा जवान हुआ और फिर समय के साथ धीरे-धीरे बूढ़ा होने लगा. एक दिन उसने यूं ही आसमान की ओर नजर उठाई, तो ऊपर एक बाज को हवा में गोते लगाते देखा. बाज की स्फूर्ति, उसकी ताकत देख वह मुग्ध था. उसे देख वह मन ही मन सोचने लगा कि काश, वह भी बाज की तरह खुले आसमान में उड़ पाता. Mind Fit 12 Column by Sundar Chand Thakur

जिस तरह बाज को अपने बाज होने का इल्म ही न था, वह खुद को चूजा समझता रहा और उसने पूरा जीवन यूं ही निकाल दिया, ठीक उसी तरह हर इंसान में परमात्मा ने बुद्ध बनने की क्षमता दी है, महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, एपीजे अब्दुल कलाम, पीटी ऊषा, साइना नेहवाल, विराट कोहली बनने की संभावना दी है, लेकिन हम अपने भीतर छिपी असीमित संभावनाओं को न देखकर ज्यादा ध्यान इस बात पर देते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या बोलते हैं, वे हमें क्या समझते हैं. बाज का बच्चा किसान के बर्ताव पर न जाकर अपने पंखों पर यकीन करता, तो आसमान की ऊंचाई छूता. उस जीवन का आनंद ही कुछ और होता. हमारे लिए भी जरूरी है कि हम अपनी ताकत पर भरोसा करें, इस बात पर ध्यान न दें कि दूसरे हमारे बारे में क्या कहते हैं. इकबाल का यह शेर यहां बहुत मौजू लग रहा है –  खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है. Mind Fit 12 Column by Sundar Chand Thakur

हमारी तकदीर हमारे ही हाथ में है. जरूरत बस अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचानने की है.

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सुन्दर चन्द ठाकुर

कवि, पत्रकार, सम्पादक और उपन्यासकार सुन्दर चन्द ठाकुर सम्प्रति नवभारत टाइम्स के मुम्बई संस्करण के सम्पादक हैं. उनका एक उपन्यास और दो कविता संग्रह प्रकाशित हैं. मीडिया में जुड़ने से पहले सुन्दर भारतीय सेना में अफसर थे. सुन्दर ने कोई साल भर तक काफल ट्री के लिए अपने बचपन के एक्सक्लूसिव संस्मरण लिखे थे जिन्हें पाठकों की बहुत सराहना मिली थी.

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