मशहूर क्रिकेट लेखक-सम्पादक जो हर्मन की एक किताब है – ‘क्रिकेटिंग ऑल सॉर्टस: द गुड. द बैड, द अग्ली एंड द डाउनराईट वीयर्ड’. किताब की भूमिका मशहूर क्रिकेटर/ कमेंटेटर डेविड लॉयड उर्फ़ बम्बल ने लिखी है.
इस दिलचस्प किताब का एक शुरुआती अध्याय छक्कों को लेकर है. अध्याय का शीर्षक है – ‘मेमोरेबल सिक्सेज़’.
छक्कों की बात हो और हमारे वीरेन्द्र सहवाग का ज़िक्र न हो, ऐसा हो नहीं सकता. सो इस चैप्टर की शुरुआत ही सहवाग से होती है.
एक वाकये को याद करते हुए लेखक बताते हैं:
“वीरेन्द्र सहवाग को थोड़ा बहुत नर्वस होने के लिए माफ़ किया जा सकता था क्योंकि वे तिहरा शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बनने से कुल पांच रनों की दूरी तक आ पहुंचे थे. उनके आदर्श यानी सचिन तेंदुलकर सामने नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े थे.”
“लेकिन वीरू का दिमाग उस तरह काम नहीं करता जिस तरह हम आम लोग सोचा करते हैं.”
“साल 2014 में वीरेन्द्र सहवाग ने कहा था – ‘मैं 295 पर था. इसके पहले कि सक़लैन मुश्ताक गेंद करता मैं सचिन के पास गया और मैंने उससे कहा कि गेंद चाहे धीमी हो या तेज़, मैं बाहर निकल कर उस पर छक्का मारूंगा. जो होना होगा हो कर रहेगा. मुझे किसी भी बात की कतई परवाह नहीं है. अब मुझे छक्का मारना है बस!'”
“और वीरेन्द्र सहवाग ने वही किया. सक़लैन मुश्ताक के गेंद फेंकते ही उसने दो कदम आगे बढ़ा कर गेंद को कवर बाउंड्री के ऊपर उड़ा दिया. इस शॉट के साथ ही वीरू ने भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहला तिहरा शतक बना दिया था. इस ट्रिपल सेंचुरी की ख़ास बात यह थी कि यह टेस्ट मैच इतिहास में सबसे तेज़ बनाई गयी ट्रिपल सेंचुरी थी. सहवाग ने अपने इस रेकॉर्ड को चार साल बाद फिर से तोड़ा था.”
भारतीय टीम के 2004 के पाकिस्तान दौरे में मुल्तान में खेले गए पहले टेस्ट में वीरेन्द्र सहवाग ने इस कारनामे को अंजाम दिया था. उन्होंने आउट होने से पहले कुल 309 रन बनाए और भारत ने यह मैच एक पारी और बावन रनों से जीत लिया.
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