हैडलाइन्स

अल्मोड़े में पीपीई किट पहनकर लिये दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे

देश में भर में बढ़ते कोरोना के मामलों के चलते आए दिन लोगों को अलग-अलग किस्म की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कोरोना काल के इस लम्बे समय में अब लोगों को इन चुनौतियों का सामना कर काम निकाल लेने की आदत भी पढ़ने लगी है.
(Marriage during Covid in Almora)

हालिया मामला अल्मोड़ा की हवालबाग तहसील का है. लाट गांव में बीकानेर से लड़के वाले शादी के लिये पहुंचे जब दुल्हन की कोरोना रिपोर्ट पाजेटिव आ गयी. दोनों पक्षों द्वारा बारात की सभी तैयारी पूरी कर ली गयी थी तब मामला एस.डी.एम सीमा विश्वकर्मा के सामने आया.

एसडीएम द्वारा पीपीई किट पहनकर शादी की अनुमति दी गयी. इसके बाद सारा विवाह कार्यक्रम पीपीई किट पहना कर किया गया. दुल्हन के माता-पिता और भाई ने भी पीपीई किट में शादी के समस्त अनुष्ठान संपन्न कराए. दूल्हा-दुल्हन ने पीपीई किट में ही एक-दूसरे को माला पहनाकर अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिये
(Marriage during Covid in Almora)

सोशियल डिस्टेंसिंग और पीपीई किट में विवाह को संपन्न कराकर लड़के पक्ष वाले बिना दूल्हन को साथ लिये ही वापस लौट गये. दुल्हन को होम आइसोलेशन में रखा गया है.

सोशियल मिडिया में इस विवाह की तस्वीरों को न केवल शेयर किया जा रहा है बल्कि एसडीएम के फैसले को भी खूब सराहा जा रहा. लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि स्थिति को देखते हुये एसडीएम का यह फैसला बेहद सही है.

एसडीएम द्वारा बताया गया कि प्रशासन की ओर से पीपीई किट भी उपलब्ध कराए गए थे. कोविड प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से पालन करने का भरोसा देने पर ही इस विवाह की अनुमति दी गई थी.

विवाह की कुछ तस्वीरें देखिये:  

काफल ट्री डेस्क
(Marriage during Covid in Almora)

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

2 days ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

5 days ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

5 days ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

5 days ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

5 days ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

5 days ago