Featured

महात्मा गाँधी का कौसानी प्रवास

भारत की आजादी के आन्दोलन में उत्तराखण्ड के कुमाऊं का स्वर्णिम योगदान रहा है. 1921 के कुली बेगार जैसे आन्दोलनों में बागेश्वर के स्थानीय नागरिकों ने गजब की राष्ट्रीय चेतना का परिचय दिया. जिस समय राष्ट्रीय आन्दोलन अपने चरम पर था उस समय पहाड़ में भी अपने हक़-हकूकों को लेकर कई आन्दोलन खड़े हुए. लोग कांग्रेस के साथ जुड़कर स्वतंत्रता आन्दोलन में अपनी भूमिका तेजी से बनाने लगे. इन आंदोलनों ने राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा.

1929 में महात्मा गाँधी कुमाऊं की यात्रा पर आये. उनका लक्ष्य क्षेत्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आन्दोलन को मजबूती प्रदान करना था. उनकी 22 दिनों की इस यात्रा का अधिकांश समय कौसानी में गुजरा लेकिन. उन्होंने यहाँ कि शांत वादियों में कई महत्वपूर्ण लेख लिखे. अनाशक्ति योग की रचना उन्होंने यहीं पर की. इस यात्रा ने कुमाऊं के स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा और शक्ति दी. कौसानी का वह बँगला स्वतंत्रता सेनानियों का मक्का-मदीना बन गया जहाँ गाँधी लगभग 15 दिन रहे. बाद में इस बंगले को अनाशक्ति आश्रम नाम दे दिया गया.
गाँधी 22 जून 1929 को बागेश्वर पहुंचे और उसी शाम कसबे में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया. इसके बाद उन्होंने स्वराज आश्रम का शिलान्यास भी किया.

यह भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय था. 1928 में साइमन कमीशन का विरोध और लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद आन्दोलन में जबरदस्त उभार आया था. इसके बाद के ही सालों में भगत सिंह की गिरफ्तारी भी हुई. भगत सिंह की गिरफ्तारी के बाद कुमाऊं में भी आन्दोलन तेज होने लगा था. ऐसे दौर में गाँधी की कुमाऊं यात्रा ने स्वतंत्रता सेनानियों के बीच एक नयी ऊर्जा का संचार किया.

-काफल ट्री डेस्क

वाट्सएप में पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

बागेश्वर के बाघनाथ मंदिर की कथा

जब नन्दा देवी ने बागनाथ देव को मछली पकड़ने वाले जाल में पानी लाने को कहा

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

1 week ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

1 week ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

1 week ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

1 week ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

1 week ago