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जिन 8 महिलाओं के करीब रहे महात्मा गांधी

महात्मा गांधी की तस्वीरों में हमेशा उनके पीछे भीड़ देखी जा सकती हैं. इन तस्वीरों में हज़ारों की संख्या में स्त्री, पुरुष और बच्चे देखे जा सकते हैं.

कस्तूरबा बाई, जवाहर लाल नेहरु, सरदार पटेल कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें महात्मा गांधी के साथ तस्वीरों में भारत के सभी लोग पहचान सकते हैं.

महात्मा गांधी के जन्मदिन पर जानिये उनके विचारों से प्रभावित आठ महिलाओं के बारे में जो गांधी के रास्ते पर चलते हुए अपनी-अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ीं.

मीराबेन

मीराबेन का वास्तविक नाम मेडेलीन स्लेड था. वह ब्रिटिश एडमिरल सर एडमंड स्लेड की बेटी थी. रोमैन रौलेंड द्वारा लिखी महात्मा गांधी की बायोग्राफी से इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने ज़िंदगी को लेकर गांधी के बताए रास्तों पर चलने की ठान ली.

सरला देवी चौधरानी

आजादी के बाद हिमालयी क्षेत्र में गांधीवादी विचारों को प्रचारित प्रसारित करने वालों में सरला देवी का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है. महात्मा गांधी से उनकी मुलाक़ात स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान हुई थी. गांधी और सरला ने खादी के प्रचार के लिए भारत का दौरा किया. गांधी सरला को अपनी ‘आध्यात्मिक पत्नी’ बताते थे.

सरोजिनी नायडू

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला भारतीय अध्यक्ष सरोजनी नायडू ने गांधी की गिरफ्तारी के बाद नमक सत्याग्रह की अगुवाई की. गांधी से उनकी पहली मुलाक़ात लन्दन में हुई थी.

मनु गांधी

मनु गांधी बहुत ही कम उम्र में महात्मा गांधी के पास आ गयी थी. मनु महात्मा गांधी की दूर की रिश्तेदार थीं. गांधी मनु को अपनी पोती कहते थे.

आभा गांधी

बंगाल में जन्मी मनु गांधी का विवाह गांधी के परपोते कनु गांधी से हुआ था. आभा गांधी, महात्मा गांधी की प्रार्थना सभाओं में भजन गाती थी. कनु गांधी फोटोग्राफी करते थे.

राजकुमारी अमृत कौर

शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली राजकुमारी पंजाब के कपूरथला के राजा सर हरनाम सिंह की बेटी थीं. गांधी राजकुमारी अमृत कौर को लिखे खत की शुरुआत ‘मेरी प्यारी पागल और बागी’ लिखकर करते और खत के आखिर में खुद को ‘तानाशाह’ लिखते.

डॉ सुशीला नय्यर

गांधी की निजी डॉक्टर सुशीला नय्यर थी. मनु और आभा के अलावा अक्सर गांधी जिसके कंधे पर अपने बूढ़े हाथ रखकर सहारा लेते, उनमें सुशीला भी शामिल थीं.

निला नागिनी

माउंट आबू में एक धार्मिक गुरु के साथ रहने वाली निला क्रैम कुक को भारतीय लोग निला नागिनी बुलाते थे. निला क्रैम कुक स्वयं को कृष्ण की गोपी बताती थी. 1933 में निला की मुलाकात यरवडा जेल में महात्मा गांधी से हुई. उन्होंने छुआछुत के ख़िलाफ काम किया था. 

( सभी फोटो और तथ्य बीबीसी हिन्दी में प्रमोद कपूर की रिपोर्ट के आधार पर. )

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Girish Lohani

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